हेडली के भाई के भारत आने पर विवाद, कहा- मैं ईमानदार अफसर, नातेदार होना पाप नहीं

आतंकी डेविड कोलमैन हेडली (उर्फ दाऊद गिलानी) के भाई और पाकिस्तान के अफसर दानियाल गिलानी ने कहा है कि वह एक ‘ईमानदार अफसर’ हैं और किसी का नातेदार होना कोई अपराध नहीं है. विवाद के बाद अपने पहले इंटरव्यू में इंडिया-टुडे आजतक से दानियाल ने कहा कि वह देश की सेवा करना चाहते हैं.हेडली के भाई के भारत आने पर विवाद, कहा- मैं ईमानदार अफसर, नातेदार होना पाप नहीं

गौरतलब है कि अटल बिहारी वाजपेयी के अंतिम संस्कार में शामिल पाकिस्तानी डेलीगेशन को लेकर विवाद शुरू हो गया था. बीते गुरुवार को दिल्ली के एम्स अस्पताल में अंतिम सांस लेने वाले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी का शुक्रवार को अंतिम संस्कार किया गया था. पाकिस्तान का चार सदस्यीय डेलीगेशन भी अटल बिहारी वाजपेयी के अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली पहुंचा था.

इस डेलीगेशन में पाकिस्तान की कार्यवाहक सरकार के कानून व सूचना प्रसारण मंत्री अली जाफर, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अंतिम संस्कार में शामिल होने दिल्ली आए थे. उनके साथ तीन अधिकारी भी थे, जिसमें दानियाल गिलानी भी शामिल थे. दानियाल गिलानी मुंबई आतंकी हमले के आरोपी डेविड हेडली के सौतेले भाई हैं.

हालांकि, पाकिस्तान सूचना सेवा के अधिकारी दालियान गिलानी के पास पाकिस्तान में कई सरकारी पदों की जिम्मेदारी है. दानियाल फिलहाल वहां की केंद्रीय फिल्म सेंसर बोर्ड के चेयरमैन होने के साथ मिनिस्टर्स ऑफिस के डायरेक्टर भी हैं. वह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के प्रेस सचिव भी रह चुके हैं. बावजूद इसके भारत के गुनहगार डेविड हेडली के भाई का पूर्व पीएम के अंतिम संस्कार में आना जख्मों पर मिर्च लगाने जैसा माना जा रहा है.

इंडिया टुडे-आजतक से खास बातचीत में दानियाल गिलानी ने कहा, मैं एक ईमानदार पाकिस्तानी सिविल सर्वेंट हूं. किसी का नातेदार होना पाप नहीं है. मैं तो सिर्फ अपने देश की सेवा कर रहा हूं.’

गिलानी को आखि‍र प्रतिनिधि‍मंडल में क्यों शामिल किया गया, इसके बारे में पाकिस्तान के एक वरिष्ठ राजनयिक सूत्र ने बताया, ‘उनके नाम पर सिर्फ इसलिए विचार किया गया क्योंकि व‍ह मंत्री के स्टॉफ ऑफिसर थे और उनका सहयोग कर रहे थे.’  उन्होंने कहा कि गिलानी वाजपेयी के अंतिम संस्कार स्थल पर नहीं गए थे और न ही वह विदेशी मंत्री सुषमा स्वराज के साथ हुए ‘शिष्टाचार भेंट’ में शामिल थे. किसी भी पाकिस्तानी अधिकारी को ‘स्मृति स्थल’ जाने की इजाजत नहीं दी गई थी.

पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल में सैयद अली जफर के अलावा डीजी साउथ एशिया डॉ. मोहम्मद फैजल, विदेश मंत्रालय में भारत निदेशक डॉ. फरेहा बुगती और दानियाल गिलानी शामिल थे.

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