लखनऊ विश्वविद्यालय में इस साल पीएचडी प्रवेश परीक्षा में माइनस मार्किंग नहीं होगी। हालांकि, अभ्यर्थियों को परीक्षा में न्यूनतम 50 फीसदी अंक लाने पर ही साक्षात्कार में शामिल होने का अवसर मिलेगा। विवि में मंगलवार को होने वाली कार्यपरिषद की बैठक में पीएचडी व एमफिल के नए ऑर्डिनेंस का प्रस्ताव रखा जाना है। नए ऑर्डिनेंस में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हैं।

नया ऑर्डिनेंस ओबीसी श्रेणी के नॉन क्रीमीलेयर और दिव्यांग अभ्यर्थियों को भी अर्हता में काफी राहत देने वाला है। नए ऑर्डिनेंस पर कार्यपरिषद की बैठक लगते ही पीएचडी व एमफिल के आवेदन शुरू कर दिए जाएंगे। पिछले सत्र तक एलयू में पीएचडी की प्रवेश परीक्षा में .25 अंकों की माइनस मार्किंग होती थी। इसका मतलब चार उत्तर गलत देने पर एक सही उत्तर के अंक कट जाते थे।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इस साल से पीएचडी व एमफिल की नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इसके अनुसार पीएचडी की प्रवेश परीक्षा में न्यूनतम 50 फीसदी अंक आना जरूरी है। हालांकि, नई व्यवस्था लागू होने के बाद बहुत से अभ्यर्थियों के लिए साक्षात्कार तक पहुंचना भी मुश्किल होगा। इसीलिए विवि ने निगेटिव मार्किंग की व्यवस्था खत्म करने का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रवेश परीक्षा दो घंटे की होगी, जिसमें अभ्यर्थियों को 100 सवालों का जवाब देना होगा।