10 अनोखी जगहें, अगर यहाँ बितायी छुट्टियां आपको रोमांच से भर देंगी

भारत एक अनोखा देश है। यहां कई तरह के मौसम हैं और हर मौसम का अपना अलग मज़ा है। जिस प्रकार से यहां की जलवायु में विविधता देखने को मिलती है, ठीक उसी प्रकार भारत में ऐसी सुन्दर जगहों की भरमार है जहां आप अपनी ज़िन्दगी में बार-बार जाना पसंद करेंगे। आपको यह जान कर आश्चर्य होगा कि हमारे आस-पास ही ऐसी कई जगहें हैं जिनकी अपनी एक विशेषता और इतिहास है। ऐसी तमाम हैरतअंगेज जगहें हैं, जो रहस्यों से भरी हैं।

भारत के विभिन्न राज्य अपने आप में ख़ूबसूरती की चादर ओढ़े ख़ड़े हैं। इन जगहों को देखने में आप अगर अपनी पूरी ज़िन्दगी भी लगा दें तो वह भी कम है। भारत में ऐसी कई अनछुई जगहें हैं जो अपनी सुंदरता से पर्यटकों को अपनी ओर लुभाती हैं। जहां अभी भी इंसान का हस्तक्षेप न के बराबर है और प्राकृतिक सुंदरता मीलों तक फैली है। यहां हम आपको कुछ ऐसी ही अज्ञात जगहों के बारे में बता रहे हैं जिनके बारे में जानकर आप रोमांच से भर जाएंगे।

1.चोपता, उत्तराखंड

चोपता उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में पड़ने वाला एक गांव है। जो भक्त या पर्यटक तुंगनाथ मंदिर जाना चाहते हैं, वह चोपता से ही अपनी यात्रा की शुरूआत करते हैं। प्रसिद्ध पांच केदार मंदिरों में से तुंगनाथ तीसरा मंदिर है। तुंगनाथ पहुंचने के लिए चोपता पर ही बेस कैंप बनाया गया है। चोपता चीड़ और देवदार के वृक्षों से भरा पड़ा है। इस जगह की सुंदरता की वजह से इसे छोटा स्विट्ज़रलैंड भी कहा जाता है। मई से नवम्बर का समय चोपता घूमने के लिए श्रेष्ठ समझा जाता है, लेकिन कुछ पर्यटक यहां की सर्दियों और बर्फबारी का मज़ा लेने दिसम्बर से मार्च महीने के बीच भी जाते हैं।

 

2.फुगताल, लद्दाख – कश्मीर

कश्मीर के विषय में ऐसा कहा जाता है कि दुनिया में अगर कहीं स्वर्ग है तो यहीं है। कश्मीर में ऐसी कई जगहें हैं जिनके बारे में आपने काफी सुना होगा, लेकिन फुगताल मठ के बारे में आप शायद ही जानते हों। यह मठ बोध धर्म के अनुयायियों के लिए है, जहां वह शिक्षा प्राप्त करते हैं। फुगताल जम्मू कश्मीर के लद्दाख में स्थित है। इस जगह का असली नाम वैसे फुकताल है, जो बाद में फुगताल में परिवर्तित हो गया। असल में फुक का मतलब होता है गुफा और ताल का अर्थ होता है मुक्ति। तो इसका अर्थ है मुक्ति दिलाने वाली गुफा। अगर आप फुगताल जाएंगे तो ताउम्र इस जगह को याद रखेंगे।

3.गजनेर वन्यजीव अभ्यारण

गजनेर वन्यजीव अभ्यारण राजस्थान के बीकानेर में स्थित है। एक समय था जब बीकानेर के महाराजा यहां पर शिकार के लिए आते थे। इस जगह की ख़ास बात यह है कि इस अभ्यारण के बीच में एक तालाब है। जहां हमेशा विभिन्न प्रकार की पक्षियों की प्रजातियां देखी जा सकती हैं। भारतीय चीते को सुरक्षित करने के लिहाज से यह अभ्यारण प्रमुख है। यहां पर विभिन्न तरह के जीव- जंतुओं की प्रजातियां देखी जा सकती हैं।

4.स्वामीमलाई शहर, तमिलनाडु

भगवान कार्तिकेय के छह मंदिरों में से एक स्वामीमलाई शहर है। यह शहर तमिलनाडु के तंजावुर से सिर्फ 31 किलोमीटर की दूरी पर बसा है। यह शहर अपने बेहतरीन कारीगरों के द्वारा बनाए जाने वाली ताम्बे के नटराज की प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। साथ ही यहां भगवान मुरुगा का मंदिर है, जो यहां काफी विख्यात है।

 

4.स्वामीमलाई शहर, तमिलनाडु

भगवान कार्तिकेय के छह मंदिरों में से एक स्वामीमलाई शहर है। यह शहर तमिलनाडु के तंजावुर से सिर्फ 31 किलोमीटर की दूरी पर बसा है। यह शहर अपने बेहतरीन कारीगरों के द्वारा बनाए जाने वाली ताम्बे के नटराज की प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। साथ ही यहां भगवान मुरुगा का मंदिर है, जो यहां काफी विख्यात है।

5.महाराष्ट्र का वेलनेश्वर समुंद्र तट

महाराष्ट्र का वेलनेश्वर समुंद्र तट अपनी स्वछता और ख़ूबसूरती के कारण प्रसिद्ध है। यह गांव रत्नागिरी से करीब 180 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह समुन्द्र तट नारियल के पेड़ों से घिरा है। इस तट के पास भगवान शिव का एक पुराना मंदिर भी है। वेलनेश्वर आने वाले पर्यटक शिव के इस मंदिर को देखने अवश्य आते हैं। वेलनेश्वर स्थित शिव का यह मंदिर शैव धर्म के रहस्‍यवाद से संबंधित है। वेलनेश्वर के समुद्र तट पर तैराकी और मोटर नौका का मजा पूरे परिवार के साथ लिया जा सकता है।

6.कर्नाटक के मूडबिदरी जैन मंदिर

कर्नाटक के मूडबिदरी में 600 साल पुराना जैन तीर्थस्थल है। इस स्थान को जैन लोगों की काशी भी कहा जाता है। कर्नाटक में मूडबिदरी के जैन मंदिर काफी प्रसिद्ध हैं। इस मंदिर को देखने के लिए देश के कई राज्यों से लोग आते हैं। इस मंदिर में कई प्राचीन और बहुमूल्य प्रतिमाएं हैं।

7.उखरुल शहर, मणिपुर

उखरुल शहर मणिपुर के उखरुल डिस्ट्रिक्ट में स्थित है। उखरुल डिस्ट्रिक्ट तांगखुल नागाओं का घर है। साथ ही यह उखरुल डिस्ट्रिक्ट का प्रशासनिक हेडक्वार्टर भी है। यहां की जन-जाति की संस्कृति काफी संपन्न है। साथ ही यहां कई किस्म के जंगली पशु- पक्षियों की प्रजातियां भी पायी जाती हैं। प्राकृतिक दृष्टि से यह स्थान बहुत सुन्दर और संपन्न है।

 

8.असकोट, उत्तराखंड

असकोट एक छोटा सा शहर है जो पिथौरागढ़ डिस्ट्रिक्ट के उत्तराखंड राज्य में स्थित है। यह शहर हिमालय की पहाड़ियों के बिल्कुल समीप बसा हुआ है। यह इलाका अपने कस्तूरी मृगों के लिए प्रसिद्ध है। इस वजह से ही इन हिरणों की सुरक्षा के लिए यहां असकोट कस्तूरी मृग अभ्यारण का निर्माण किया गया है। देखने पर असकोट पूरी तरह से प्रकृति की गोद से घिरा नज़र आता है।

9.मट्टुपेट्टी, केरल

मट्टुपेट्टी दक्षिण भारत के केरल राज्य में स्थित है। मट्टुपेट्टी समुन्द्र तल से 1700 मीटर की ऊंचाई पर बसा है। यहां पर चाय के कई बागान हैं। लोग यहां पर बनी झील और बांध पर लोग पिकनिक मनाने आते हैं। मट्टुपेट्टी के अंदर व आस-पास वन ट्रैकिंग करने की सुविधा उपलब्ध है। ये जंगल विभिन्न प्रकार के पक्षियों का घर भी हैं। यहां एक छोटी सी नदी और पानी का स्रोत भी है। यह जगह देखने में बहुत मनमोहक है। ये सब चीज़ें मट्टुपेट्टी के आकर्षण को और बढ़ाती हैं।

 

10. संदाकफू, दार्जिलिंग

दार्जिलिंग में स्थित संदाकफू भारत के ईस्ट में फैला है। दार्जिलिंग समुद्र तल से 3,636 मीटर की ऊंचाई पर बसा एक खूबसूरत शहर है तथा संदाकफू ईस्ट में दार्जिलिंग जिले में है। संदाकफू का मतलब जहरीले पेड़-पौधों से है। संदाकफू की पहाड़ों की चोटियों पर जहरीले एकोनाइट पेड़ पाए जाते हैं। दार्जिलिंग में संदाकफू का सिंगालीला रेंज ट्रैकिंग के लिए फेमस है। इसलिए इसे पैराडाइज ऑफ ट्रैकर्स के नाम से भी जाना जाता है। यहां अनेक खूबसूरत चोटियां हैं जैसे एवरेस्ट, कंचनजंघा, मकालू और ल्ओत्से जो आपको रोमांच से भर देंगी।

 

यह कुछ ऐसे पर्यटक स्थल हैं जिनके नाम आपने शायद ही सुने हों, लेकिन यकीन मानिये इनमें से कुछ जगहें अभी भी मनुष्य की पहुंच से अछूती हैं। इसलिए अबकी बार अगर परिवार के साथ छुट्टियां बिताने का मन बनाएं तो इन जगहों को अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें।

 
 

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