10 साल सत्ता में रहकर हममें भी घमंड आ गया था, फिर सबक सीखा: राहुल गांधी

राहुल गांधी ने कहा है कि 2014 के आम चुनावों में मिली हार से पार्टी ने सबक सीखा है. साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि 10 साल तक सत्ता में रहने की वजह से उसमें ‘एक हद तक दंभ’ आ गया था.अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि 2014 के आम चुनावों में मिली हार से पार्टी ने सबक सीखा है. साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि 10 साल तक सत्ता में रहने की वजह से उसमें 'एक हद तक दंभ' आ गया था.  लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटजिक स्टडीज में एक सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने कहा, 'आपको सुनना होगा-नेतृत्व का आशय सीखना है.' उनसे जब पूछा गया कि उनकी पार्टी ने 2014 में मिली चुनावी शिकस्त से क्या सीखा तो उन्होंने कहा, '10 साल तक सत्ता में रहने के बाद कांग्रेस में कुछ हद तक दंभ आ गया था और हमने सबक सीखा.'  2014 चुनाव में कांग्रेस की हार से लिए गए सबक के बारे में उन्होंने कहा कि नेतृत्व का काम सबको सुनना है, सहृदयता है. उन्हें लगता है कि पार्टी के रूप में कांग्रेस में घमंड आ गया था. इसलिए यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि पार्टी दरअसल लोग होते हैं. कांग्रेस में यह सभी के लिए एक सीख है.  राहुल ने कहा कि भारत नौकरियां देकर ही अपना कद बढ़ा सकता है और भारत में 'नौकरियों का संकट' है. उन्होंने कहा, 'मैं काफी हद तक हिंसा का सामना किया है. उन अनुभवों ने मुझे लोगों के प्रति दयालु बना दिया. मैं उन लोगों के प्रति सहानुभूति महसूस करता हूं जो कमजोर और सताये हुए होते हैं.'  राहुल गांधी ने कहा, 'मैं अर्थव्यवस्था, समाजशास्त्र और राजनीति को अलग-अलग नहीं देखता. ये सब एक प्रक्रिया है जो एक साथ काम करती है. भारत में इस प्रक्रिया ने 100 वर्षों में 1.3 अरब लोगों को बदल दिया.'  रोजगार पर बोलते हुए उन्होंने कहा, 'भारत में रोजगार की बड़ी समस्या है और भारत सरकार इसे मान नहीं रही है. चीन जहां एक दिन में 50 हजार नौकरियां दे रहा है, वहीं हमारे यहां एक दिन सिर्फ 450 नौकरियां दी जा रही हैं. यह एक आपदा की तरह है. देश में रोजगार बड़ी समस्या है, और पहले इसे स्वीकार करना होगा, लेकिन सरकार इसको स्वीकार नहीं कर रही.'  उन्होंने कहा, 'मैं विभिन्न समुदायों के पास जाना पसंद करता हूं. एक सामान्य भारतीय किसान किसी कृषि विशेषज्ञ से ज्यादा ज्ञान रखता है.' सामाजिक न्याय के मामले पर बोलते हुए उन्होंने कहा, 'मैं सरकार को अधिकार देने वाले के तौर पर देखता हूं. सामाजिक न्याय केवल तभी संभव है जब लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत किया जाए.'  राहुल गांधी ने अगले साल होने वाले आम चुनाव के बारे में बोलते हुए कहा कि अगला चुनाव बेहद सीधा है. एक तरफ भाजपा है और दूसरी तरफ हर विपक्षी दल है. इसका कारण ये है कि, पहली बार भारतीय संस्थानों पर हमला किया गया है.

लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटजिक स्टडीज में एक सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने कहा, ‘आपको सुनना होगा-नेतृत्व का आशय सीखना है.’ उनसे जब पूछा गया कि उनकी पार्टी ने 2014 में मिली चुनावी शिकस्त से क्या सीखा तो उन्होंने कहा, ’10 साल तक सत्ता में रहने के बाद कांग्रेस में कुछ हद तक दंभ आ गया था और हमने सबक सीखा.’

2014 चुनाव में कांग्रेस की हार से लिए गए सबक के बारे में उन्होंने कहा कि नेतृत्व का काम सबको सुनना है, सहृदयता है. उन्हें लगता है कि पार्टी के रूप में कांग्रेस में घमंड आ गया था. इसलिए यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि पार्टी दरअसल लोग होते हैं. कांग्रेस में यह सभी के लिए एक सीख है.

राहुल ने कहा कि भारत नौकरियां देकर ही अपना कद बढ़ा सकता है और भारत में ‘नौकरियों का संकट’ है. उन्होंने कहा, ‘मैं काफी हद तक हिंसा का सामना किया है. उन अनुभवों ने मुझे लोगों के प्रति दयालु बना दिया. मैं उन लोगों के प्रति सहानुभूति महसूस करता हूं जो कमजोर और सताये हुए होते हैं.’

राहुल गांधी ने कहा, ‘मैं अर्थव्यवस्था, समाजशास्त्र और राजनीति को अलग-अलग नहीं देखता. ये सब एक प्रक्रिया है जो एक साथ काम करती है. भारत में इस प्रक्रिया ने 100 वर्षों में 1.3 अरब लोगों को बदल दिया.’

रोजगार पर बोलते हुए उन्होंने कहा, ‘भारत में रोजगार की बड़ी समस्या है और भारत सरकार इसे मान नहीं रही है. चीन जहां एक दिन में 50 हजार नौकरियां दे रहा है, वहीं हमारे यहां एक दिन सिर्फ 450 नौकरियां दी जा रही हैं. यह एक आपदा की तरह है. देश में रोजगार बड़ी समस्या है, और पहले इसे स्वीकार करना होगा, लेकिन सरकार इसको स्वीकार नहीं कर रही.’

उन्होंने कहा, ‘मैं विभिन्न समुदायों के पास जाना पसंद करता हूं. एक सामान्य भारतीय किसान किसी कृषि विशेषज्ञ से ज्यादा ज्ञान रखता है.’ सामाजिक न्याय के मामले पर बोलते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं सरकार को अधिकार देने वाले के तौर पर देखता हूं. सामाजिक न्याय केवल तभी संभव है जब लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत किया जाए.’

राहुल गांधी ने अगले साल होने वाले आम चुनाव के बारे में बोलते हुए कहा कि अगला चुनाव बेहद सीधा है. एक तरफ भाजपा है और दूसरी तरफ हर विपक्षी दल है. इसका कारण ये है कि, पहली बार भारतीय संस्थानों पर हमला किया गया है.

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