2017 में BSE के स्मॉल कैप इंडेक्स में 59.64% की हुई बढ़ोतरी

2017 में जबर्दस्त रिटर्न देने वाले बंबई शेयर बाजार (बीएसई) के स्माल और मिड कैप सूचकांकों के लिए 2018 के शुरुआती महीने मुश्किल भरे रहे हैं। शुरुआती तीन महीनों में इनमें 12 फीसद तक की गिरावट आ चुकी है। इनकी तुलना में 30 शेयरों वाले सेंसेक्स में फीसद की गिरावट दर्ज की गई है।2017 में BSE के स्मॉल कैप इंडेक्स में 59.64% की हुई बढ़ोतरी

2017 में बीएसई के स्मॉल कैप इंडेक्स में 59.64 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। मिड कैप सूचकांक में भी कमोबेश यही स्थिति रही थी। इनमें 48.13 फीसद की वृद्धि हुई थी। वहीं सेंसेक्स में 27.91 फीसद की बढ़ोतरी हुई थी। साल की शुरुआत भी बाजार के लिए अच्छी रही थी। स्माल कैप इंडेक्स ने 15 जनवरी को 20,183.45 का रिकॉर्ड स्तर छू लिया था, जबकि मिड कैप इंडेक्स ने नौ जनवरी को 18,321.37 का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। फिर एक के बाद एक कारणों से बाजार में शुरू हुआ गिरावट का दौर मार्च तक भी नहीं थम पाया है।

पहली फरवरी को 2018-19 के लिए बजट जारी करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लांग टर्म कैपिटल गेंस (एलटीसीजी) टैक्स दोबारा लगाने की घोषणा की थी। इससे बाजार में तेज गिरावट आई। बाद में घरेलू व वैश्विक स्तर पर बढ़े बांड यील्ड के चलते भी बाजार पर बिकवाली का दबाव दिखा।

जनवरी में 6.36 फीसद का उछाल लेने वाला सेंसेक्स फरवरी में 4.79 फीसद और मार्च में 3.16 फीसद गिर गया। स्माल कैप में इस साल अब तक 11.62 फीसद और मिड कैप इंडेक्स में अब तक 10.43 फीसद की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में किसी भी अनिश्चितता के माहौल में छोटे स्टॉक ज्यादा प्रभावित होते हैं।

कोटक सिक्योरिटीज के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसीडेंट (स्ट्रेटजी) संदीप चोरडिया ने कहा, ‘जैसे-जैसे वित्त वर्ष 2018-19 की ओर कदम बढ़े हैं, राजनीतिक अनिश्चितता, बढ़े बांड यील्ड, ग्लोबल ट्रेड वार की आशंका और विदेशी निवेश में गिरावट जैसी एक के बाद एक परेशानियां आई हैं। अगले वित्त वर्ष में बाजार की दिशा पर कर्नाटक, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे बड़े प्रदेशों के चुनावी नतीजों का बड़ा असर पड़ेगा।’ बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, छोटे स्टॉक में अक्सर घरेलू निवेशक ही पैसा लगाते हैं, जबकि विदेशी निवेशकों का निवेश ब्लूचिप्स पर केंद्रित रहता है।

स्माल कैप फर्मो का बाजार मूल्यांकन औसतन ब्लूचिप कंपनियों के 10वें हिस्से के बराबर है। वहीं मिड कैप इंडेक्स में शामिल कंपनियों का औसत बाजार पूंजीकरण बड़ी कंपनियों के पांचवें हिस्से के बराबर है।

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