’25 हजार करोड़ के एयर इंडिया के विमान कल-पुर्जों की कमी के कारण बेकार खड़े हैं’

कर्ज में फंसी सार्वजनिक विमानन कंपनी एयर इंडिया ने कल-पुर्जों की कमी के कारण नौ एयरबस ए-321 समेत 19 विमानों को परिचालन से बाहर किया हुआ है. इससे उसकी उड़ानें तो रद्द हो ही रहीं हैं उसे राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. कंपनी के विमानचालकों के एक संगठन ने यह आरोप लगाया. इंडियन कमर्शियल पायलट्स एसोसिएशन (आईसीपीए) ने एयर इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक प्रदीप सिंह खरोला को भेजे पत्र में यह जानकारी देते हुये कहा कि इनके अलावा विमानों के बेड़े में भी अदला-बदली हो रही है जिससे ऐन मौके पर विमानों की उपलब्धता प्रभावित हो रही है.

संगठन ने आरोप लगाया, ‘‘कल-पुर्जों की कमी के कारण एयर इंडिया बेड़े के 23 प्रतिशत विमान परिचालन से बाहर हैं. इस लिहाज से आज की कीमत के आधार पर करीब 3.6 अरब डॉलर यानी करीब 25 हजार करोड़ रुपये के विमान हैंगर में निष्क्रिय खड़े हैं.’’ एयर इंडिया के 20 एयरबस ए-321 विमानों में से आठ विमान कल-पुर्जों की कमी के चलते परिचालन से बाहर हैं. चार ए-319 भी निष्क्रिय पड़े हैं. इनके अलावा पांच बोइंग777 और दो बोइंग 787 ड्रीमलाइनर भी परिचालन से बाहर हैं.

संगठन का कहना है कि ए319 विमान घरेलू नेटवर्क के लिये काफी उपयोगी हैं. इनका इस्तेमाल अधिक व्यवस्तता वाले मार्गों पर किया जाता है. लेकिन इन विमानों के खड़ा होने की वजह से दैनिक आधार पर काफी राजस्व का नुकसान हो रहा है. इसी तरह ए320 की स्थिति फिलहाल बेहतर है, इसमें नये विमानों को लाया गया है. बोइंग 777 बेड़े में से पांच विमान हैंगर में खड़े हैं. इसी प्रकार 787 ड्रीमलाइनर्स के 26 विमानों में से दो खड़े हैं. संगठन ने इन विमानों के परिचालन से बाहर रहने को लेकर प्रबंधन पर सवाल खड़ा करते हुए कहा, ‘‘इसका एयर इंडिया के मुनाफे पर गंभीर असर पड़ रहा है.

11 हजार करोड़ के पैकेज पर विचार
इस बीच आर्थिक बदहाली के शिकार एयर इंडिया को नागर विमानन मंत्रालय 11,000 करोड़ रुपये का राहत पैकेज उपलब्ध कराने के लिए वित्त मंत्रालय के साथ विचार विमर्श कर रहा है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एयर इंडिया के निजीकरण में मिली विफलता के चलते मंत्रालय इस मामले में विचार कर रहा है. एयर इंडिया का वित्तीय संकट लगातार बना हुआ है. सूत्रों के अनुसार नागर विमानन मंत्रालय एयर इंडिया को राहत पैकेज देने पर विचार कर रहा है ताकि विमानन कंपनी को उसकी ऊंची लागत के कार्यशील पूंजी कर्ज से राहत मिल सके. अभी यह प्रस्ताव शुरूआती चरण में है.

इस संबंध में नागर विमानन सचिव आर. एन. चौबे को भेजे गए सवालों का जवाब नहीं मिला है. वहीं एयर इंडिया प्रवक्ता ने कहा, ‘‘यह मामला नागर विमानन मंत्रालय के तहत आता है. हमें इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए.’’ सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव हालांकि अभी शुरुआती स्तर पर है, लेकिन इसके तहत एयर इंडिया को 11,000 करोड़ रुपये का पैकेज उपलब्ध कराया जायेगा.

एक सूत्र ने कहा, ‘‘एयर इंडिया के खाते को साफ सुथरा बनाने से एयरलाइन को निवेशकों के लिये आकर्षक बनाया जा सकेगा. सरकार जब कभी भी इसकी रणनीतिक बिक्री के लिये आगे आयेगी तब यह निवेशकों के लिये आकर्षक होगी.’’ एयर इंडिया को पिछली संप्रग सरकार ने 2012 में राहत पैकेज दिया था. उसी के बल पर यह अभी तक उड़ान भर रही है. मार्च 2017 की समाप्ति पर इस राष्ट्रीय विमानन कंपनी पर 48,000 करोड़ रुपये का ऋण बोझ था. पिछले महीने ही सरकार ने एयरलाइन में 980 करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी डालने संबंधी अनुपूरक अनुदान मांगों को संसद की मंजूरी के लिये पेश किया.

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