यूपी से बड़ी खबर: दारोगा भर्ती परीक्षा पेपर लीक करने वाला गैंग पकड़ा गया

लखनऊ: यूपी पुलिस की आनलाइन दारोगा भर्ती परीक्षा के पेपर लीक के मामले में यूपी एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में एसटीएफ ने परीक्षा करने वाले एक इंस्टीट्यूट के तीन अधिकारियों सहित 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इंस्टीट्यूट के इन अधिकारियों ने जालसाजों से मिलकर पेपर लीक कराया था। इस पेपर लीक के मामले में अभी और भी लोगों की गिरफ्तारी होनी है।


एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश ने बताया कि 21 जुलाई से लेकर 31 जुलाई के बीच यूपी पुलिस में दारोगा भर्ती के लिए आनलाइन परीक्षा होनी थी। इस परीक्षा को यूपी के 97 केन्द्रों पर आयोजित किया जाना था। यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड ने परीक्षा की जिम्मेदारी मुम्बई की एनएसईआईटी नाम की एक कम्पनी को दी थी। परीक्षा से पहले ही इसके पेपर लीक हो गये और सोशल मीडिया पर वायरल हो गये थे।

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दारोगा भर्ती परीक्षा को निरस्त कर दिया गया था। वहीं डीजीपी सुलखान सिंह ने एसटीएफ को इस संबंध में अपने साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कर दोषियों को पकडऩे का आदेश दिया था। डीजीपी के इस आदेश के बाद लखनऊ एसटीएफ मुख्यालय में स्थित साइबर थाने में एफआईआर दर्ज करायी गयी थी। मामले की छानबीन की जिम्मेदारी एसटीएफ की साइबर क्राइम यूनिट को दी गयी थी।

एसटीएफ ने जब छानबीन शुरू की तो पता चला कि मुम्बई की एनएसआईटी कम्पनी ने आगरा के ओम ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशन से परीक्षा कराने के संबंध में अनुबंध किया था। अपनी छानबीन में एसटीएफ को इस बात का पता चला कि ओम ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशन के अधिकारियों ने पेपर लीक गिरोह से हाथ मिलकर पेपर को लीक कराया था। वहीं पेपर लीक करने वाले गिरोह ने प्रति अभ्यार्थी 10 लाख रुपये लिये थे।

बस इसी जानकारी के आधार पर विवेचना आगे बढ़ायी गयी तो 7 लोगों का नाम एसटीएफ के सामने आया। 22 अगस्त को एसटीएफ ने ओम ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशन के वेन्यू स्पोक पर्सन हरियाणा निवासी गौरव आनंद, आईडी हेड हरियाणा निवासी बलराम, ओम ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशन के इनविजीलेटर मथुरा निवासी पुष्पेन्द्र, अभ्यार्थी अलीगढ़ निवासी दिनेश कुमार,अलीगढ़ निवासी दीपक कुमार, मिर्जापुर निवासी राकेश कुमार विश्वकर्मा और एक बिचौलिये अलीगढ़ निवासी गौरव खत्री को पूछताछ के लिए बुलाया। एसटीएफ मुख्यालय पर हुई कई घंटे की पूछताछ के बाद सातों आरोपियों ने पेपर लीक की बात कबूल की। इसके बाद यूपी एसटीएफ ने सभी को गिरफ्तार कर लिया। एसटीएफ ने उनके पास से पांच मोबाइल फोन और 9 सिमकार्ड बरामद किये हैं।

गैंग का सरगना सौरभ जेल में है बंद
दारोगा भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले का मुख्य आरोपी सौरभ जाखड़ है। वह पकड़े गये आरोपी गौरव आनंद का सगा भाई है। आईजी एसटीएफ ने बताया कि आरोपी सौरभ आन लाइन रेलवे परीक्षा में धोखाधड़ी के मामले में फरार चल रहा है। मौजूदा समय में वह हत्या के एक मामले में परवल जिला जेल में बंद है। सौरभ ने ही जेल में रहते हुए दारोगा भर्ती पेपर लीक की पूरी प्लानिंग की थी। अभ्यर्थियों से रुपये लेने से लेकर सॉल्वर सब कुछ सौरभ ने तय किया था। बस सौरभ की बनायी गयी योजना पर उसके गैंग ने जेल से बाहर रहते हुए काम किया था। पकड़े गये अभ्यर्थी दिनेश और दीपक सगे भाई हैं। उन लोगों ने गैंग को तीन-तीन लाख रुपये एडवांस दिये थे।

पकड़े गये आरोपी राकेश कुमार के पास मिला प्रशन पत्र
एसटीएफ ने दारोगा भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले का खुलासा तो किया है, पर यह खुलासा अभी आधा अधुरा है। पकड़े गये राकेश कुमार के पास परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र व उसका उत्तर सोशल मीडिया के माध्यम से पहुंच गया था। अब एसटीएफ इस बात का पता लगा रही है कि राकेश को प्रश्न पत्र व उत्तर कैसे और कहां से मिले। यह बात खुद एसटीएफ मान रही है कि अभी इस मामले में और भी कई नाम सामने आने बाकी है। अभी जो लोग एसटीएफ के हत्थे चढ़े हैं ,वह मात्र इस गैंग की एक कड़ी भर है। जालसाजों का यह गैंग काफी बढ़ा है। आईजी एसटीएफ अमिताभ यश ने बताया कि अभी विवेचना चल रही है और जैसे-जैसे नाम सामने आते जायेंगे, वैसे उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।

इस तरह काम करता है यह गैंग
एसटीएफ के साइबर क्राइल सेल के हेड एडिशनल एसपी त्रिवेणी सिंह ने बताया कि जालसाजों का यह गैंग प्रत्येक परीक्षा केन्द्र के परीक्षा संचालयक, आईटी हेड व इनविजीलेटर से संगठन कर परीक्षा केन्द्र के समस्त कम्प्यूटर टर्मिनल पर रिमोट एक्सेस टूल इंस्टाल करा लिया जाता था। इसके बाद उक्त कम्प्यूटर का यूजर आईडी व पासवर्ड गैंग के सरगान के पास पहुंच जाता था। इसके बाद जैसे ही कोई अभ्यर्थी आनलाइन परीक्षा देने के लिए उस टर्मिनल्स पर पहुंचता था। सरगान सॉल्वर का उस कम्प्यूटर पर एक्सेस दिला देता था। बस इसके बाद पेपर को अभ्यर्थी की जगह सॉल्वर आनलाइन दे देता था।

लोकल सर्वर को हैक पर भी हासिल किये गये पेपरएसटीएफ को अपनी छानबीन में इस बात का भी पता चला है कि आनलाइन के अलावा परीक्षा कराने वाले मुम्बई की एनएसईआईटी कम्पनी के लोकल सर्वर को हैक करके भी प्रश्न पत्र हासिल किये थे। इसके बाद इन प्रश्न पत्रों के उत्तर बनाकर अभ्यर्थियों को सोशल मीडिया की मदद से पहुंचाया गया था।

कम्पनी ने सिक्योरिटी का इंतजाम नहीं किया था
एसटीएफ की साइबर क्राइम यूनिट का कहना है कि आनलाइन परीक्षा करने वाली कम्पनी ने इंनर्फोमेशन सिक्योरिटी पालिसी के निधार्रित मानकों को पालन नहीं किया था। कम्पनी की लचर व्यवस्था का फायदा गैंग ने बड़ी आराम से उठाया। एसटीएफ का कहना है कि कम्पनी ने आनलाइन सिक्योरिटी के मूलभूत सिद्घांत फीजिक्ल, एडमिनिस्टे्रटिव और टेक्नीकल काउंटर मैजर्स की अनदेखी की गयी थी।

 

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