सीएम योगी आदित्यनाथ के पास कोई भी सम्पत्ति नहीं, जानिए क्या-क्या है उनके पास!

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अब कहीं भी कोई सम्पत्ति अपने नाम पर नहीं खरीदी है। यह बात सुनने में थोड़ी अजीब है पर सच है। उनके पास से सिर्फ एक 12 हजार रुपये का मोबाइल फोन, दो असलहे, दो सोने के आभूषण ,दो गाडिय़ां और कुछ बैंक बैलेंस है। इसके अलावा सीएम योगी आदित्यनाथ के पास कुछ भी नहीं है।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास मोबाइल फोन तो महज 12 हजार रुपये का है लेकिन कान में वह जो 20 ग्राम सोने के कुंडल धारण करते हैैंए उनकी कीमत 49 हजार रुपये है। उनके पास प्रॉपर्टी कोई नहीं है पर नकदी, बैैंक बैलेंस, गाडिय़ों और एक रिवॉल्वर व एक राइफल को मिलाकर वह कुल जमा 95.98 लाख रुपये के स्वामी हैं। विधान परिषद उपचुनाव के लिए मुख्यमंत्री ने अपने शपथ पत्र में यह ब्योरा रिटर्निंग अधिकारी को सौंपा है। इसमें योगी ने बताया है कि उनके पास सिर्फ दो स्वर्ण आभूषण हैं।

कुंडल के अलावा दूसरा आभूषण 26 हजार रुपये की 10 ग्राम सोने की वह चेन हैए जिसमें योगी रुद्राक्ष पहनते हैं। मुख्यमंत्री के पास दो असलहे भी हैं। इनमें रिवॉल्वर की कीमत एक लाख रुपये और राइफल की कीमत 80 हजार रुपये बताई गई है। योगी के मालिकाना हक में दो गाडिय़ां हैं। 2014 मॉडल की टोयोटा फॉच्र्यूनर की कीमत 13.11 लाख रुपये और 2013 मॉडल की टोयोटा इनोवा कीमत 8.72 लाख रुपये बताई गई है।

मुख्यमंत्री के पास नकद रकम तो सिर्फ 22 हजार रुपये है लेकिन बैैंक खातों में लाखों रुपये हैं। इनमें दिल्ली के संसद मार्ग स्थित स्टेट बैैंक के बचत खाते में 31.12 लाख रुपये हैं जबकि इसी बैैंक में उन्होंने 6.82 लाख रुपये के तीन फिक्स्ड डिपॉजिट कराए हैं। मुख्यमंत्री के पास गोरखपुर स्थित स्टेट बैैंक के खाते में 6857 रुपये और गोरखपुर के ही पंजाब नेशनल बैैंक में 3.62 लाख रुपये जमा हैैंए जबकि इसी पंजाब नेशनल बैैंक में 6.35 लाख रुपये के तीन फिक्स्ड डिपॉजिट भी हैैं।

इसके अलावा दिल्ली में संसद मार्ग स्थित डाकघर के भविष्य निधि खाते में उनके पास 22.57 लाख रुपये और गोरखपुर के डाकघर में 68 हजार रुपये जमा हैैं। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2016-17 में अपनी वार्षिक आय कुल 8,40,998 रुपये बताई है। उन्होंने सांसद के तौर पर मिलने वाले वेतन व भत्तों को ही आय का स्त्रोत बताया है। मुख्यमंत्री ने ऐसे मुकदमों की संख्या चार बताई है जिन पर न्यायालयों ने संज्ञान लिया हो। हालांकि ऐसा एक भी मामला नहीं है जिसमें उन पर न्यायालय द्वारा आरोप तय किए गए हों।

 

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