Fake: लखनऊ में पकड़ा गया फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज, पढि़ए कैसे करता था काम!

लखनऊ: विदेश में बैठे भारतीय को सस्ते दरों में इंटरनेशल कॉल कराने और भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचने वाले दो लोगों को कृष्णानगर पुलिस ने इंटेलिजेंस विभाग की मदद से पकड़ा है। यह लोग फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज खोलकर अंतराष्टï्रीय कॉल को लोकल कॉल बनाकर बात कराते थे। इस गैंग का लीडर मौजूदा समय  में सउदी अरब में मौजूद है। पकड़े गये जालसाजों ने हजरतगंज और कैसरबाग इलाके में तीन सर्वर लगा रहे थे।


एसएसपी दीपक कुमार ने बताया कि अभिसूचना मुख्यालय और अन्य एजेंसियो से इस बात का इनपुट मिला था कि राजधानी में कुछ जगह पर फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज काम कर रहा है। इस एक्सचेंज को चलाने वाले लोग अपने बनाये गये अलग-अलग एप से विदेशी से की जाने वाली कॉल को लोकल कॉल बनाकर बात कर रहे हैं।

इस जालसाजी की वजह से जहां एक तरफ अंतराष्टï्रीय कॉल ट्रेस नहीं हो पा रही है, वहीं अर्थव्यवस्था को भी नुकसान हो रहा है। इस सूचना के बाद राजधानी की कृष्णानगर पुलिस ने छानबीन शुरू की तो पता चला कि हजरतगंज के तेज कुमार प्लाजा में एक टूर एण्ड ट्रेवल कम्पनी की आड़ में फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज काम कर रहा है।

इसके बाद कृष्णानगर पुलिस ने तेज कुमार प्लाज स्थित टूर एण्ड ट्रेवल कम्पनी के मालिक गोरखपुर निवासी नूर और उसके एक साथी गोरखपुर निवासी मनोज कुमार को गिरफ्तार किया। पुलिस ने टूर एण्ड ट्रेवल कम्पनी में लगे दो सर्वर और आरोपी नूर के कैसरबाग मकबूलगंज स्थित घर से एक सर्वर यानि सिम बाक्स बरामद किया। हर सिम बाक्स में 32-32 सिमकार्ड लगे थे। इसके अलावा पुलिस ने आरोपियों से कूल 113 फर्जी सिमकार्ड, 22 पासपोर्ट, एक लैपटाप, 2 माडम, 9 एंटीना, तीन मोबाइल फोन व अन्य उपकरण बरामद किया है। पकड़े गये आरोपी नूर ने बताया कि सउदी अरब में मौजूद उसका साथी नसीम इस धंधे का काम वहां से संभालता है।

इस तरह काम करता है फर्जी एक्सचेंज
इंटेलिजेंस विभाग में तैनात एडिशनल एसपी विनय चंद्रा ने बताया कि खाड़ी देश में रहने वाले भारतीय जब भी अपने घर फोन करते है तो वह कॉल अंतराष्टï्रीय कॉल मानी जाती है और उसकी दरें काफी होती है। खाड़ी देश में बैठ कुछ भारतीयों ने इंटरनेट की मदद से कुछ एप ऐसे बनाये तो अंतराष्टï्रीय कॉल को सीधे भारत में लगे उनके सिम बाक्स पर ट्रांसफर कर देती है। इसके बाद वहीं अंतराष्टï्रीय कॉल लोकल कॉल बन जाती है। विदेश में बैठे लोगों को वहां मौजूद जालसाज 60 प्रतिशत कम दामों में अंतराष्टï्रीय कॉल कराने की लालच देते थे। इसके लिए वह लोग उनसे रुपये लेते थे। रुपये देने के बाद उस व्यक्ति के मोबाइल फोन पर अपना बनाया हुआ एप डाउनलोड करने को कहते है। एप डाउनलोड होने से विदेश में बैठा व्यक्ति उसी एप की मदद से अपने देश में फोन करता है। उसकी की गयी कॉल सबसे पहले फर्जी एक्सचेंंज पर आती है। इसके बाद इंटरनेट कॉल फर्जी एक्सचेंज में लगे किसी भी खाली सिमकार्ड पर लोकल कॉल की तरह ट्रांसफर हो जाती है और इस तरह अंतराष्टï्रीय कॉल लोकल बन जाती है। वहीं विदेश से की गयी कॉल विदेशी नम्बर नहीं बल्कि भारतीय नम्बर से आती है। इस तरह जालसाज मोटी रकम कमाते हैं और भारतीय अर्थव्यवस्था को विदेश कॉल से होने वाली आमदनी को भी नुकसान पहुंचाते हैं।

सुरक्षा के लिहाज भी इस तरह की कॉल है खतरनाक
इंटेलिजेंस विभाग से जुड़े लोगों ने बताया कि इस तरह के फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। हवाला से लेकर संगठित अपराध के लिए इस तरह की नेटवर्क का प्रयोग किया जाता है, ताकि सुरक्षा एजेंंसियां यह भी पता न लगा सके कि कॉल देश से आयी थी या फिर विदेश से। सूत्र बताते है कि इस तरह की फर्जी कॉलिंग हवाले के रुपये इधर से उधर करने और किसी बड़े अपराध को अंजाम देने के लिए विदेश में बैठे माफिया करते हैं।

पकड़ा गया आरोपी नूर सउदी मेें ड्राइवर का काम कर चुका है
इंटेलिजेंस विभाग के एडिशनल एसपी विनय चंद्रा ने बताया कि पकड़ा गया आरोपी नूर कुछ समय पहले सउदी अरब में रहकर बतौर ड्राइवर का काम करता था। इसके बाद कुछ रुपये कामने के बाद वह भारत लौट आया था। उसने लखनऊ में आकर टूर एण्ड ट्रेवल का काम शुरू किया, पर उसमें कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद वह अपने गांव के रहने वाले नसीम के सम्पर्क में आया। नसीम ने उसको विदेशी कॉलिंग के बारे में बताया। इसके बाद से नूर अपने साथी मनोज के साथ मिलकर यह काम करने लगा।

फर्जी नाम व पते पर खरीदे गये सिमकार्ड का होता है प्रयोग
फर्जी ढंग से चले गये इस टेलीफोन एक्सचेंज को चलाने से हाईस्पीड इंटरनेट लाइन और फर्जी नाम व पते से खरीदे गये सिमकार्ड का प्रयोग किया जाता है। जालासाजों के मौजूद एक सिम बाक्स मेें 16 से 32 सिमकार्ड लगाने का स्लाट होता है। यह लोग प्रयोग किये जाने वाले सभी सिमकार्ड फर्जी ढंग से खरीदते हैं। जानकार बताते हैं कि सिमकार्ड के आधार कार्ड से लिंक करने की व्यवस्था के पूरी तरह लागू होने के बाद यह काम कर पाना जालसाजों के लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि फर्जी नाम व पते से खरीदे गये सभी सिमकार्ड आधार कार्ड लिंक न होने से बंद हो जायेंगे। इसके बाद इन जालसाजों को आधार से लिंक सिमकार्ड का इस्तेमाल करना होगा जिसको पकडऩा बेहद ही आसान हो जायेगा।

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