CM, 19 मंत्री, 40 MLA ने लगाई ताकत, फिर भी इसलिए हारी BJP

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले सत्ता का सेमीफाइनल कहे जाने वाले कोलारस और मुंगावली विधानसभा सीटों पर पूरी ताकत झोंकने के बावजूद बीजेपी कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ में हार गई.  CM, 19 मंत्री, 40 MLA ने लगाई ताकत, फिर भी इसलिए हारी BJP

मुंगावली से कांग्रेस के प्रत्याशी बृजेश सिंह यादव को 70 हजार 808 वोट मिले. बीजेपी प्रत्याशी बाई साहेब से उनके जीत का अंतर महज 2123 वोट रहा. वहीं, कोलारस विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया. यहां कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र सिंह को 82 हजार 518 वोट मिले. बीजेपी प्रत्याशी देवेंद्र जैन से उनके जीत का अंतर 8,086 वोट रहा. हालांकि, भाजपा को कांग्रेस के गढ़ में वोटों की जबरदस्त बढ़त मिली है.

ध्यान देने वाली बात यह है कि अप्रैल 2017 से अब तक हुए उपचुनावों में लगातार कांग्रेस की यह चौथी जीत है. इससे पहले कांग्रेस ने अटेर और चित्रकूट सीटों पर भी जीत दर्ज की थी.

बता दें कि इन दोनों विधानसभा सीटों पर बीजेपी ने पूरी ताकत झोंक दी. यहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा और 19 मंत्रियों समेत 40 से ज्यादा विधायकों ने दौरे, सभाएं कीं.

राजनीतिक जानकारों की माने तो इन नतीजों ने ये साफ़ संकेत दिए हैं कि मध्यप्रदेश में अब जनता को वादों का झुनझुना देकर या जातिगत आधार पर चुनाव नहीं जीता जा सकता है. साथ ही यह भ्रम भी टूटता दिखाई दिया कि सत्ताधारी दल को उपचुनाव में आसानी से जीत मिल जाती है.

इन दोनों सीटों को जीतने के लिए बीजेपी और कांग्रेस पर ख़ासा दबाव था. दोनों ही पार्टियों ने जोड़-तोड़ की पूरी कोशिश की. आलम यह था कि मतदान से एक दिन पहले तक दोनों तरफ से 16 एफआईआर दर्ज हुईं.

माना यह जा रहा है कि ये नतीजे कांग्रेस को नई ऊर्जा देने के साथ ही भाजपा में संगठनात्मक फेरबदल की संभावनाओं को न केवल मजबूत करेंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि भाजपा विधानसभा चुनाव लड़ने की रणनीति में क्या बदलाव करेगी.

सबसे बड़ी बात तो यह है कि लगातार 14 साल से मध्य प्रदेश में बीजेपी सरकार विकास से जुड़े मुद्दे उठाती है. हजार करोड़ों रुपये से अधिक की घोषणाएं भी करती है. लेकिन हकीकत में घोषणाएं केवल जुमले बनकर रह जाते हैं. कहा तो यह भी जा रहा है कि बीजेपी की ये शिकस्त परोक्ष रूप से एंटी इनकंबेंसी की ओर संकेत हैं.

इसके अलावा बीजेपी की हार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान की पहली चुनावी कवायद के रूप में भी देखा जा रहा है. बता दें कि कोलारस विधानसभा उपचुनाव में कार्तिकेय किरार समाज का सम्मेलन संबोधित करने गए थे. बीजेपी को उम्मीद थी कि युवराज को अपने बीच पाकर किरार- धाकड़ समाज भाजपा के पक्ष में जमकर वोट करेंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. कोलारस में किरार बेल्ट से कांग्रेस 3706 को वोट प्राप्त हुए हैं और भाजपा को वोट 3439 मिले है.

अब आने वाले समय में मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि ज्योतिरादित्य सीएम कैंडिडेट बनकर मैदान में आएंगे या नहीं. वहीं, बीजेपी आने वाले चुनाव में क्या पैंतरा आजमाती यह देखना दिलचस्प होगा. क्योंकि केंद्र और राज्य में उनकी ही सरकार है.

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