नहीं थम रहा है गोरखपुर के BRD अस्पताल में मौत का सिलसिला, 4 दिन में 76 बच्चों की हुई मौत

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मौत का तांडव जारी है. पिछले 24 घंटे में 13 मासूमों की मौत हुई है, जबकि बीते 96 घंटों में 76 बच्चों की मौत हो गई है. बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 29 अगस्त की रात 12 बजे से 30 अगस्त की रात 12 बजे तक 24 घंटे में 13 बच्चों की मौत हुई है. इनमें एनआईसीयू में 08 और पीआईसीयू में अलग-अलग बीमारियों से 5 बच्चों की मौत हुई है. बता दें कि एनआईसीयू में कुल 114 और पीआईसीयू में 240 मरीज भर्ती हैं. अगस्त महीने में अब तक 399 बच्चों की मौत हुई है.नहीं थम रहा है गोरखपुर के BRD अस्पताल में मौत का सिलसिला, 4 दिन में 76 बच्चों की हुई मौत#Video: इस क्लास रूम में मासूम पर 2 मिनट तक लगातार करती रही थप्पड़ो की बारिश…देखें विडियो!

कॉलेज के पूर्व प्राचार्य और पत्नी को न्यायिक हिरासत

गोरखपुर स्थित बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के मामले में आरोपी पूर्व प्राचार्य और उनकी पत्नी को गुरुवार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनिरुद्ध सिद्धार्थ पंकज ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के निलम्बित पूर्व प्राचार्य डॉक्टर राजीव मिश्रा और उनकी पत्नी डॉक्टर पूर्णिमा शुक्ला को व्यापक पुलिस सुरक्षा में अपर सत्र न्यायाधीश (अष्टम) शिवानंद सिंह की अदालत में पेश किया गया.

अदालत ने डॉक्टर दम्पति को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में देने का आदेश दिया, जिसके बाद दोनों को गोरखपर जिला जेल भेज दिया गया. गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में बीते 10 और 11 अगस्त को संदिग्ध हालात में करीब 30 बच्चों की मौत के हाई प्रोफाइल मामले में आरोपी डॉक्टर दम्पति की पेशी के मद्देनजर न्यायालय परिसर पूरी तरह से पुलिस छावनी में तब्दील हो गया.

जेल प्रशासन ने पूर्व प्राचार्य राजीव मिश्रा और उनकी पत्नी को सुरक्षा की दृष्टि से अलग-अलग बैरक में रखने की व्यवस्था की है. जेल प्रशासन ने दोनों के भोजन को चखकर परोसने की व्यवस्था बनाई है. 

मालूम हो कि पिछली 10 और 11 अगस्त को मेडिकल कॉलेज में संदिग्ध हालात में कम से कम 30 बच्चों की मौत की उच्चस्तरीय जांच में दोषी पाये जाने पर राजीव मिश्रा और उनकी पत्नी पूर्णमिा शुक्ला समेत नौ आरोपियों के खिलाफ बीते 23 अगस्त को लखनऊ स्थित हजरतगंज कोतवाली में साजिश रचने, धोखाधड़ी, गैर इरादतन हत्या की कोशिश इत्यादि के आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया था. बाद में यह मामला गोरखपुर के गुलहरिया थाने में स्थानान्तरित कर दिया गया था.

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