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आज से गुरु हो रहे वक्री, किसके बनेंगे काम किसकी बढ़ेगी परेशानी

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का वक्री होना चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि इसका हमारे जीवन में किसी न किसी रूप में प्रभाव जरूर पड़ता है। आज यानी 20 जून से देवताओं गुरु ग्रह ब्रहस्पति कुंभ राशि में गोचर करने जा रहे हैं। इतना ही नहीं वह इस राशि में वक्री चाल से चलेंगे। वक्री मतलब उल्टी चाल चलेंगे। यह ग्रह प्रत्येक 13 माह में एक बार चार महीने के लिए वक्री होता है। बृहस्पति ग्रह 20 जून को रात 8.35 बजे कुंभ राशि में वक्री हों। वह इस राशि में 14 सितंबर तक रहेंगे और इसके बाद वह मकर राशि में प्रवेश करेंगे। वक्री गुरु को नए निवेश के लिए अच्छा नहीं माना जाता है क्योंकि इस दौरान जीतने की संभावना बहुत कम होती है।
बृहस्पति ग्रह को कुंडली में भाग्य और प्रचुरता का कारक माना जाता है। वक्री गुरु का मतलब समय खराब होने से नहीं लगाया जाना चाहिए, बल्कि यह समय आत्म अवलोकन और अपनी योजनाओं पर पुनर्विचार करने का होता है। इस दौरान आप अपनी योजनाओं में नयापन लाने की कोशिश कर सकते हैं। गुरु के वक्री होने पर जीवन में एक ठहराव या रुकावट महसूस होने लगती है। मगर इसका मतलब यह नहीं लगाया जाना चाहिए आपका भाग्य सो गया है या बुरा समय चल रहा है। आइए जानते हैं गुरु की वक्री चाल किस राशि पर कैसा असर डालेगी।
मेष – गुरु मेष राशि के 9वें और 12 वें घर के स्वामी होते हैं। उनका यह राशि परिवर्तन 11वें भाव में हो रहा है। इसके प्रभाव से नौकरी में पदोन्नति या नर्इ नौकरी की संभावना है।
वृष – वृष राशि के जातकों को इस समय जल्दबाजी में निर्णय लेने और किसी से वाद-विवाद से बचना चाहिए। यह समय कारोबार के लिहाज से अच्छा रहने की उम्मीद है।
मिथुन – मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय मिश्रित परिणामों वाला हो सकता है क्योंकि गुरु का गोचर उनके भाग्य स्थान यानी 9वें भाव में हो रहा है। पारिवारिक दृष्टि से यह समय सामान्य है मगर सतर्क रहने की जरूरत है।
कर्क – गुरु की वक्री चाल कर्क राशि के जातकों की सेहत के लिए अच्छी नहीं है, उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इस समय अच्छे से सोच-विचार कर ही किसी नए काम में हाथ डालें।
सिंह – सिंह राशि के विवाहित जातकों को जीवनसाथी के साथ मतभेद से बचना चाहिए। इसके अलावा उनके लिए यह समय अच्छा है और धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी व कारोबार में फायदा हो सकता है।
कन्या – कन्या राशि के जातकों के लिए गुरु की वक्री चाल परेशानी वाली हो सकती है। गुरु उनकी कुंडली के छठे यानि शत्रु भाव गोचर करेंगे। इस दौरान स्वास्थ्य समेत निजी जीवन में भी नाना प्रकार की दिक्कतें आ सकती हैं।
तुला – तुला राशि के जातकों को इस समय धैर्य और गंभीरता से काम करना होगा। गुरु का यह राशि परिवर्तन उनकी कुंडली के पांचवें यानी संतान व बुद्धि के भाव में हो रहा है। स्वास्थ्य का खास ध्यान रखें और नए निवेश से बचें।
वृश्चिक – गुरु का राशि परिवर्तन आपकी कुंडली के चौथे भाव में हो रहा है। यह सुख और एश्वर्य को दर्शाता है। इस दौरान आपका आर्थिक मजबूत रहने का अनुमान है और मेहनत का फल मिलने की उम्मीद है। वाद-विवाद से बचें, नर्इ गाड़ी या मकान खरीद सकते हैं।
धनु – धनु राशि के जातकों के लिए यह समय अच्छा है। उनके सुख के संसाधनों में बढ़ोतरी हो सकती है। कारोबार से जुड़े जातकों को भी मुनाफा मिल सकता है। मगर अपनी वाणी पर संयम रखें क्योंकि किसी करीबी से मतभेद के भी योग हैं।
मकर – मकर राशि के जातकों के लिए यह समय बहुत सावधनी बरतने वाला है, अन्यथा वे बड़ी परेशानी में पड़ सकते हैं। गुरु का यह राशि परिवर्तन आपकी कुंडली के धन व वाणी के भाव में हो रहा है। इस दौरान व्यय बढ़ सकते हैं, परिवार में अनबन हो सकती है और सेहत में भी उतार-चढ़ाव हो सकता है।
कुंभ – गुरु के इस गोचर से आपके पद-प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी हो सकती है और आर्थिक हालात भी अच्छे रहेंगे। हालांकि इस दौरान आपको दो चीजें का ध्यान रखना होगा एक सेहत और दूसरा किसी पर सहज भरोसा नहीं करना है।
मीन – गुरु का यह परिवर्तन आपके खर्चे बढ़ा सकता है। इस दौरान आपको बचत के नए रास्ते तलाश करने के बारे में सोचना चाहिए। इस समय में आप धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों से जुड़ेंगे और शस्त्रुओं को भी परास्त करने में सफल हो सकते हैं।
अपराजिता श्रीवास्तव
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