HIV पॉजिटिव ब्लड से बनी लेडी डायना की तस्वीर

ब्रिटेन की राजकुमारी लेडी डायना की मृत्यु को 21 साल हो चुके हैं, प्रिंस चार्ल्स को तलाक देने के पांच साल बाद 1997 में जब लेडी डायना की मौत हुई तो वो शाही परिवार की सबसे मशहूर शख्सियत थीं. एक कर हादसे में उनकी मौत हुई थी, लेकिन दुनिया छोड़ने के इतने सालों बाद भी लेडी डायना एक बार फिर सुर्ख़ियों में आ गई हैं, वजह है उनकी पेंटिंग, जो कि HIV पॉजिटिव ब्लड से बनाया गया है. यह पोट्रैट कोनोर कोलिन्स  ने बनाया है.ब्रिटेन की राजकुमारी लेडी डायना की मृत्यु को 21 साल हो चुके हैं, प्रिंस चार्ल्स को तलाक देने के पांच साल बाद 1997 में जब लेडी डायना की मौत हुई तो वो शाही परिवार की सबसे मशहूर शख्सियत थीं. एक कर हादसे में उनकी मौत हुई थी, लेकिन दुनिया छोड़ने के इतने सालों बाद भी लेडी डायना एक बार फिर सुर्ख़ियों में आ गई हैं, वजह है उनकी पेंटिंग, जो कि HIV पॉजिटिव ब्लड से बनाया गया है. यह पोट्रैट कोनोर कोलिन्स  ने बनाया है.    दरअसल, 1987 में ब्रिटेन की राजकुमारी ने एक HIV पॉजिटिव व्यक्ति से हाथ मिलाया था, इसके बाद उन्होंने उस पीड़ित व्यक्ति को एक स्पेशल मैसेज भी भेजा था. लेडी डायना खुद एड्स के प्रति बनी रूढ़िवादी सोच को तोडना चाहती थी, वे इस बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाना चाहती थी.     राजकुमारी के इसी मैसेज को आगे बढ़ने के लिए उनके इस पोट्रैट को HIV पॉजिटिव ब्लड से बनाया गया है, साथ ही इसमें डाइमंड डस्ट का भी इस्तेमाल किया गया है. पोट्रैट बनाने वाले कोलिन्स का कहना है कि बरसों पहले जब राजकुमारी ने पीड़ित व्यक्ति से हाथ मिलाया था, तब भी दुनिया को काफी हैरानी हुई थी और आज भी दुनिया में इस बीमारी को घृणा के रूप में देखा जाता है, हमें इस तरह की सोच को तोडना होगा, क्योंकि पीड़ित व्यक्ति भी हमारी तरह इंसान ही हैं.

दरअसल, 1987 में ब्रिटेन की राजकुमारी ने एक HIV पॉजिटिव व्यक्ति से हाथ मिलाया था, इसके बाद उन्होंने उस पीड़ित व्यक्ति को एक स्पेशल मैसेज भी भेजा था. लेडी डायना खुद एड्स के प्रति बनी रूढ़िवादी सोच को तोडना चाहती थी, वे इस बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाना चाहती थी. 

राजकुमारी के इसी मैसेज को आगे बढ़ने के लिए उनके इस पोट्रैट को HIV पॉजिटिव ब्लड से बनाया गया है, साथ ही इसमें डाइमंड डस्ट का भी इस्तेमाल किया गया है. पोट्रैट बनाने वाले कोलिन्स का कहना है कि बरसों पहले जब राजकुमारी ने पीड़ित व्यक्ति से हाथ मिलाया था, तब भी दुनिया को काफी हैरानी हुई थी और आज भी दुनिया में इस बीमारी को घृणा के रूप में देखा जाता है, हमें इस तरह की सोच को तोडना होगा, क्योंकि पीड़ित व्यक्ति भी हमारी तरह इंसान ही हैं. 

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