IIT की छात्रा ने किया था आत्महत्या, सामने आया एक खौफनाक सच का खुलासा

आईआईटी दिल्ली की छात्रा 28 साल की मंजुला देव द्वारा की गई आत्महत्या देश में इस तरह की पहली घटना नहीं है। देश के इन सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग स्थानों से सूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले छह वर्ष में यहां 28 विद्यार्थियों ने आत्महत्याएं कर ली हैं। उच्च शिक्षा के इन संस्थानों में एडमिशन पाने के लिए अपने सारे प्रयास झोंक देने वाली पीढ़ी का ऐसा व्यवहार न केवल चौंकाने वाला, बल्कि हताश करने वाला भी है।IIT की छात्रा ने किया था आत्महत्या, सामने आया एक खौफनाक सच का खुलासा
इन सबके बीच सरकारी संस्थानों से मिली जानकारी से कुछ अलग करते हुए पिछले कई वर्षों से आईआईटी में विद्यार्थियों की आत्महत्याओं की सूचनाओं पर अपना डेटाबेस बना रहे आईआईटी मद्रास के पूर्व छात्र रामकृष्ण स्वामी के पास कुछ और जानकारियां भी हैं। उनके अनुसार 2011 से 2017 के बीच इन संस्थानों के 45 विद्यार्थियों ने आत्महत्याएं की हैं।
वहीं रामकृष्ण द्वारा बनाए गए डेटाबेस के अनुसार 1981 से 2004 तक कुल पांच आत्महत्याएं दर्ज हो सकी थीं, हाल के वर्षों में यह संख्या कई गुना बढ़ गई हैं। अकेले 2014 में आईआईटी के 14 विद्यार्थियों ने आत्महत्या कर ली थी। दूसरी ओर 1981 से अब तक सबसे अधिक आत्महत्याएं आईआईटी कानपुर में दर्ज की गई हैं। इसके बाद आईआईटी मद्रास और आईआईटी खड़गपुर व बॉम्बे आते हैं जहां क्रमश 14 और 13-13 आत्महत्याएं दर्ज की गईं।
यहां अच्छे प्रदर्शन का दबाव हमेशा होता है, जिसमें पिछड़ने पर उन्हें महसूस होता है कि इसके आगे उनके लिए कोई जीवन नहीं है। देश के सबसे बेहतर संस्थानों में एडमिशन पाने के बावजूद वे आत्मविश्वास खोने लगते हैं और यह बात घर कर जाती है कि वे इन संस्थानों के लिए नहीं बने। तो कहां जाएं? शायद यहीं से आत्महत्या जैसे कदम उठाने का विचार मन में आने लगता है। डॉ. दलाल बताते हैं कि उनके विभाग में आने वाले किशोरों में अधिकतर केवल अपने कॅरिअर व भविष्य को लेकर इतने तनाव में होते हैं कि सामान्य जीवन जीना भी भूल जाते हैं।

बीते तीन साल में: 2014 में आईआईटी कानपुर में तीन किशोरों ने आत्महत्या की। इसी साल खड़गपुर और गुवाहाटी में भी तीन-तीन विद्यार्थियों की आत्महत्याएं सामने आईं। दिल्ली और बॉम्बे आईआईटी की दो-दो और रुड़की की एक आत्महत्या मिला दें तो इस वर्ष कुल 14 विद्यार्थियों की मौत हुई जो अब तक किसी भी वर्ष में आईआईटी विद्यार्थियों द्वारा की गई आत्महत्याओं में सर्वाधिक है।

2015 में गुवाहाटी में फिर से तीन विद्यार्थियों ने आत्महत्याएं की। उसी वर्ष बॉम्बे और मद्रास में ऐसे दो-दो मामले सामने आए। पिछले वर्ष यानी 2016 आईआईटी बॉम्बे व गुवाहाटी में दो-दो, गांधीनगर व मद्रास में एक-एक आत्महत्याएं दर्ज हुईं।

 

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