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International Yoga Day: बेहद असरदार योगासन

     आजकल कि भागती-दौड़ती लाइफ में लोगों के पास न तो अपने लिए समय है और न ही अपनों के लिए. आज जो बीमारियां फैल रही हैं उससे लड़ने के लिए हमें खुद को फिट रखने कि जरूरत है. इसके लिए आप को हेल्दी डाइट और रोजाना एक्सरसाइज करना चाहिए. एक्सरसाइज किसी भी प्रकार में किया जा सकता है. आप जिम जा सकते हैं, दौड़ सकते हैं, डांस कर सकते हैं और योगा भी कर सकते हैं. एक स्वस्थ जीवन जीना सभी कि ख्वाहिश होती है, और उसी कला को योग कहते हैं.

आज अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर संपूर्ण विश्व के लोग अच्छी सेहत प्राप्त करने के लिए योग कर रहें हैं. योग में बहुत शक्ति है जो आपको सभी रोगों से लड़ने के लिए मजबूत कर निरोगी काया देती है. तो आज से आप भी संकल्प लीजिए और योगा कि शुरुआत कीजिए. इसके लिए हम आपकी मदद करेंगे.

योग वैसे तो हमारी भारतीय संस्कृति की बहुत ही पुरानी पद्दति है. लेकिन योग दिवस मनाने का सुझाव हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया. उनके सुझाव से 21 जून 2015 को पहली बार कुछ देशों को छोड़कर पूरी दुनिया में योग दिवस मनाया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी के नेतृत्य में 21 जून 2015 को पहला अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस मनाया गया था, जिसमें 35,985 लोगों और 84 देशों के प्रतिनिधियों ने दिल्‍ली के राजपथ पर योग के 21 आसन किए थे. ​इस समारोह ने दो गिनीज रिकॉर्ड्स हासिल किए. विद्वान लोग कहते हैं कि 21 जून का दिन तय करने के पीछे एक कारण था वह यह कि 21 जून वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है, यह मनुष्य के दीर्घ जीवन को दर्शाता है.

तो हम भी अपनी दीर्धायु के लिए योग करें. आज हम आपको मात्र 5 ऐसे आसन बताएंगे जिसको नियमित करते रहने से जीवन में आप कभी शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार नहीं होंगे.

1. सूर्य नमस्कार

सूर्य नमस्कार में योग के लगभग सभी आसन समाए हुए हैं. सूर्य नमस्कार की 12 स्टेप को 12 बार करेंगे तो चमत्कारिक लाभ मिलेगा.

2. वृक्षासन

वृक्षासन को करने से शरीर और मन का संतुलन बढ़ता है. पैर मजबूत, कमर और कुल्हों के आसमास जमा अतिरिक्त चर्बी को हटाता है. यह तोंद नहीं निकलने देता. ध्रुवासन भी कुछ इसी तरह का होता है.

3. पद्मासन में ध्यान

पद्मासन को करने से रक्त-संचार कम हो जाता है और अतिरिक्त रक्त अन्य अंगों की ओर संचारित होने लगता है जिससे उनमें क्रियाशीलता बढ़ती है. इसके साथ ध्यान करने से यह तनाव हटाकर चित्त को एकाग्र कर सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है.

4. अर्धमत्स्येंद्रासन

अर्धमत्स्येंद्रासन से मेरुदंड स्वस्थ रहने से स्फूर्ति बनी रहती है. रीढ़ की हड्डियों के साथ उनमें से निकलने वाली नाड़ियों को भी अच्छी कसरत मिल जाती है. विवृत, यकृत, प्लीहा तथा निष्क्रिय वृक्क के लिए यह आसन लाभदायी है.

5. सर्वांगासन

थायराइड एवं पिट्यूटरी ग्लैंड के मुख्य रूप से क्रियाशील होने से यह कद वृद्धि में लाभदायक है. दमा, मोटापा, दुर्बलता एवं थकानादि विकार दूर होते हैं. इस आसन का पूरक आसन मत्स्यासन है, शवासन में विश्राम से पूर्व मत्स्यासन करने से इस आसन से अधिक लाभ प्राप्त होते हैं.

By- कविता सक्सेना श्रीवास्तव

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