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जितिया व्रत की तैयारी शुरू, जानें व्रत का तरीका और महत्व

        व्रत-त्योहार का सिलसिला कुछ दिन में शुरू होने वाला है। पितृ पक्ष के बाद नवरात्र से इसकी शुरुआत हो जाएगी। इसके बाद भारत में त्योहारों की धूम रहेगी। लेकिन इससे पहले बुधवार को जितिया व्रत के लिए घरों में लोग तैयारी कर रहे हैं। यह जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है। यह अश्विन मास में अष्टमी तिथि के दिन मनाया जाता है। बताया जाता है कि यह व्रत संतान की लंबी आयु के लिए माताएं करती हैं। यह व्रत बिना कुछ खाए व पिए किए जाता है। कहा जाता है कि द्रौपदी के पांचों पुत्रों को जब अश्वत्थामा ने मार दिया तो उनकी जिंदगी के लिए द्रौपदी को धौम्य ऋषि ने इस व्रत के मारे में बताया था। यह अष्टमी में व्रत करके नवमी में पारण किया जाता है। इसमें कुश का जीमूतवाहन या फिर लव-कुश बनाकर पूजा की जाती है और कथा सुनी जाती है।

क्या है व्रत का मुहूर्त
28 सितंबर को व्रत शुरू होगा और यह 30 सितंबर तक चलेगा। यह भी एक तरह से छठ की तरह की होता है। इसमें नहाय-खाय का भी चलन है। इसके बाद इसका पारण करना होता है। ज्योतिष आचार्य की मानें तो 28 को तीन बजकर 5 मिनट पर अष्टमी योग है यह 29 सितंबर को शाम 4 बजकर 54 मिनट तक रहेगी। ऐसे में 29 सितंबर को सूर्योदय होने पर ही यह व्रत मनेगा और 30 सितंबर को सुबह 6 बजे पारण किया जाएगा।

क्या है परंपरा और व्रत का तरीका
वैसे तो व्रत और त्योहार पर मासांहार का सेवन नहीं किया जाता है लेकिन इस व्रत में कई जगह लोग मछली खाकर भी व्रत करते हैं। इस परंपरा के पीछे का कारण व्रत कथा में चील और सियार का होना है। व्रत से पहले महिलाएं गेहूं के आटे की रोटियां और मरुआ के आटे की रोटी खाती हैं। नोनी का साग भी बनाया जाता है। व्रत के दिन महिलाएं स्नान करके भगवान की पूजा जीमूतवाहन बनाकर करती हैं। लाल रंग का धागा चढ़ाना शुभ माना जाता है। इसमें सोने का लाकेट होता है जिसे महिलाएं खुद पहनकर बच्चों को पहनाती हैं। बाद में माताएं धारण करती हैं।

GB Singh

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