अभी-अभी: वित्त मंत्री के वकीलों ने केजरीवाल पर जानूबूझ कर केस को लंबा खींचने का लगाया आरोप….

वित्त मंत्री अरुण जेटली मंगलवार को फिर दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे, जहां केजरीवाल और पांच AAP नेताओं के ख़िलाफ़ मानहानि से जुड़े केस में उनसे सवाल पूछे गए. ये सवाल मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह, अशुतोष, दीपक वाजपेयी, कुमार विश्वास और राघव चड्ढा के वकीलों ने पूछा. इस दौरान जेटली के वकीलों ने केजरीवाल पर जानूबूझ कर केस को लंबा खींचने का आरोप लगाया.अभी-अभी: वित्त मंत्री के वकीलों ने केजरीवाल पर जानूबूझ कर केस को लंबा खींचने का लगाया आरोप....गोरखपुर हादसा: नहीं खत्म हो रहा है मौत का सिलसिला, BRD अस्पताल में तीन दिन में 61 बच्चों ने तोड़ा दम

दरअसल, अरुण जेटली ने केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के 5 नेताओं के खिलाफ सिविल मानहानि का मुकदमा दिल्ली हाइकोर्ट में किया है. क्रॉस एग्जामिनेशन के दौरान मंगलवार को अरुण जेटली से कोर्ट में कुल 30 सवाल पूछे गए.  

क्रॉस एग्जामिनेशन के दौरान अरुण जेटली से पूछे गए सवाल पुराने थे. अरुण जेटली के वकीलों ने आरोप लगाया है कि केजरीवाल के वकील घिसे-पिटे पूछ रहे है क्योंकि उनके पास कुछ नया नही है. ज्यादातर सवालों को अलग-अलग तरीके से बार-बार पूछने पर अरुण जेटली के वकील कई बार झल्लाए और कोर्ट में इसका विरोध किया.

अरुण जेटली से बार-बार केजरीवाल के वकील एक ही सवाल पूछ रहे थे कि कांग्रेस नेताओं ने भी AAP पर DDCA में अनियमितता को लेकर सवाल किए थे, लेकिन AAP ने उन पर केस क्यों नही किया? क्यों आपने केजरीवाल और AAP नेताओं को ही चुना मानहानि मुकदमा के लिए. इस सवाल के जवाब मे जेटली यही दोहराते रहे कि दिल्ली सरकार के कुछ अधिकारियों पर सीबीआई ने जब भ्रष्टाचार की शिकायत को लेकर कार्रवाई की तो केजरीवाल और उनकी पार्टी के नेताओं नेताओं ने उनके खिलाफ बयान देकर उन पर (जेटली) अपना गुस्सा निकाला औऱ उनको बदनाम किया. 

अब इस मामले में जेटली का क्रॉस एग्जामिनेशन 30 और 31 अक्टूबर को होगा. मामले में अगली तारीख को लेकर जेटली और केजरीवाल के वकीलों में बहस हुई. जेटली के वकील कोर्ट से जल्द तारीख देने की मांग कर रहे थे, तो वही केजरीवाल के वकीलों के तरफ से दलील दी जा रही थी कि इसम मामले में अर्जेंसी नही है, इसलिए दिसंबर का कोर्ट डेट दे. इससे पहले दिल्ली हाइकोर्ट पिछले हफ़्ते ही केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर चुका है जिसमें मानहानि की याचिका पर जल्द सुनवाई को टालने की गुहार लगाई गई थी. हाइकोर्ट ने याचिका ख़ारिज करते हुए कहा था कि ये पहली याचिका है जिसमें मामले को लंबा खीचने के लिए कोर्ट से कहा जा रहा है.

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