उत्तरप्रदेश

अटल बिहारी वाजपेयी पर थी गांधी और नेहरू के विचारों की छाप

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धाजंलि देने का सिलसिला दूसरे दिन शुक्रवार को भी जारी रहा। विपक्षी दलों ने भी वाजपेयी के व्यक्तित्व और कृतित्व की सराहना करने में तंगदिली नहीं दिखाई। कांग्रेस ने बताया कि अटलजी पर महात्मा गांधी व जवाहर लाल नेहरू के विचारों की छाप थी, तो राष्ट्रीय लोकदल ने उन्हें सर्व समाज का हितचिंतक करार दिया। वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया में अटलजी से जुड़ी तस्वीरें भी साझा की। राजधर्मों के मूल्यों को नहीं छोड़ा प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अशोक सिंह ने अटलजी की सराहना करते हुए उन्हें विश्व पटल पर भारतीय छवि को नए आयाम देने वाला महान व्यक्तित्व बताया। उन्होंने कहा कि गांधीवादी विचारों से प्रभावित होने के कारण अटलजी ने कभी सत्ता की खातिर राजधर्मों के मूल्यों को नहीं छोड़ा। उनका पार्टियां तोड़ कर सरकार बनाने में विश्वास नहीं था। पंडित नेहरू के निधन पर सदन में 55 मिनट का भाषण उनकी असाधारण सोच को दर्शाता है। उन्होंने इस बात को माना कि भारत के विकास में कांग्रेस का भी योगदान रहा। अटलजी सभी धर्मों को साथ लेकर चलने की भावना रखते थे। लखनऊ से तो अटल ही रहेगा अटल बिहारी वाजपेयी का नाता यह भी पढ़ें रालोद में शोकसभा राष्ट्रीय लोकदल के मुख्यालय में शुक्रवार को शोकसभा आयोजित की गई। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मसूद अहमद की अध्यक्षता में संपन्न शोकसभा में अटलबिहारी वाजपेयी के निधन पर दुख जताते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। प्रदेश अध्यक्ष डा. मसूद व राष्ट्रीय सचिव शिवकरन सिंह का कहना था कि अटल जैसा व्यक्तित्व पुन: मिलना असंभव है। इस मौके पर अनिल दुबे, वसीम हैदर, सुरेंद्र नाथ त्रिवेदी, युवा रालोद के प्रदेश अध्यक्ष अंबुज पटेल, अभिषेक चौहान, रमावती, प्रीति और रविंद्र पटेल व मनोज चौहान उपस्थित रहे।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धाजंलि देने का सिलसिला दूसरे दिन शुक्रवार को भी जारी रहा। विपक्षी दलों ने भी वाजपेयी के व्यक्तित्व और कृतित्व की सराहना करने में तंगदिली नहीं दिखाई। कांग्रेस ने बताया कि अटलजी पर महात्मा गांधी व जवाहर लाल नेहरू के विचारों की छाप थी, …

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गोरखपुर में बिजली के लिए त्राहिमाम, बस्ती मंडल में भी तीन प्रभावित रहेगी आपूर्ति

गोरखपुर में बिजली के लिए त्राहिमाम, बस्ती मंडल में भी तीन प्रभावित रहेगी आपूर्ति

सीएम सिटी में बिजली के लिए त्राहिमाम मची है। आए दिन फाल्ट होने से लोक परेशान हैं। शनिवार को राप्ती नदी के बीच टॉवर संख्या आठ पर जंपर कट जाने से तारामंडल, सहारा इस्टेट, खोराबार, लोहिया आदि उपकेंद्रों की आपूर्ति सुबह तकरीबन आठ बजे गुल हो गई। गड़बड़ी का पता …

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बिल्हौर में 225 मेगावॉट के सोलर पावर प्लांट स्थापना में आई तेजी

बिल्हौर में 225 मेगावॉट के सोलर पावर प्लांट स्थापना में आई तेजी

बिल्हौर तहसील के नदिहा खुर्द में पहले 1320 मेगावॉट का सुपर थर्मल पावर प्लांट स्थापित किया जाना था। दिसंबर माह में तय किया गया कि अब यहां 225 मेगावॉट का सोलर पावर प्लांट स्थापित किया जाएगा। सारी प्रक्रिया पूरी हो गई, लेकिन आज तक विद्युत विभाग से बिजली की दरों …

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UP में अब चलेगी ‘अटल भावनाओं’ की लहर, अस्थि विसर्जन का रोडमैप तैयार

UP में अब चलेगी 'अटल भावनाओं' की लहर, अस्थि विसर्जन का रोडमैप तैयार

भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति में मेरठ में छह माह का रोडमैप तैयार कर भाजपा अपना चुनावी रथ आगे बढ़ाने की तैयारी में थी लेकिन, 16 अगस्त को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन ने कार्यकर्ताओं को हिला कर रख दिया। इसके बाद तो सभी कार्यक्रम स्थगित कर …

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भाजपा के पितृ पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी ने मंदिर आंदोलन से बनाए रखी निश्चित दूरी

जहां उनके डिप्टी लालकृष्ण आडवाणी पूरी पार्टी के साथ मंदिर आंदोलन का शंखनाद कर रहे थे, वहीं भाजपा के पितृ पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी ने इस आंदोलन से निश्चित दूरी बनाए रखी। ऐसा नहीं है कि अयोध्या उनके लिए अपरिचित थी या वह रामलला के अनुरागी नहीं थे। वह 1957 में बलरामपुर से चुनावी संपर्क के साथ ही अयोध्या के संपर्क में आए। दिल्ली अथवा लखनऊ से बलरामपुर आते-जाते प्राय: अयोध्या से गुजरते और कुछ बार रुकते थे पर 1984 से मंदिर आंदोलन शुरू होने तक उनकी राह बदल चुकी थी। इसके बाद अटल जी का अव्वल तो अयोध्या आने का नियमित क्रम बंद हो गया। इसके बाद वह जब अयोध्या आए, तब भी राम मंदिर मकसद नहीं था। 1989 के विस चुनाव में वह पार्टी प्रत्याशी लल्लू सिंह के समर्थन में चुनावी सभा को खिताब करने आए। हालांकि तब तक मंदिर आंदोलन उभार की ओर था।इसके बावजूद अटल ने मंदिर-मस्जिद के विषय से दूरी बनाए रखी। स्थानीय गुलाबबाड़ी के मैदान में आधा घंटा से अधिक का उनका भाषण सधा, काव्यात्मक एवं राजनीतिक मूल्यों के इर्द-गिर्द था। 89 में शिलान्यास और 90 की कारसेवा से छह दिसंबर 92 तक मंदिर मुद्दा उभार पर था पर अटल जी इसके स्पर्श से बचे रहे। 90 में वे नवनिर्मित रामकी पैड़ी की पुलिया टूट जाने के मामले की समीक्षा करने आयी पार्टी की उच्च स्तरीय समिति का नेतृत्व किया। मंदिर आंदोलन से दूरी पर अयोध्या से गहन नाता यह भी पढ़ें 1996 में प्रधानमंत्री बनने से पूर्व भी अटल अयोध्या आए और मंदिर आंदोलन के पर्याय रहे रामचंद्रदास परमहंस से भेंट की। मौका चुनाव का था और परमहंस को अटल गोरखपुर चुनावी सभा में ले जाना चाहते थे। प्रधानमंत्री रहते उन्होंने दो बार रामनगरी की यात्रा की। 2003 में रामचंद्रदास परमहंस के साकेतवास पर और अगले वर्ष वह प्रधानमंत्री के तौर पर पुन: अयोध्या में थे। इस बार उन्होंने रेलवे पुल का उद्घाटन किया और बताया कि अयोध्या मंदिर ही नहीं विकास की दृष्टि से भी अहम है।

जहां उनके डिप्टी लालकृष्ण आडवाणी पूरी पार्टी के साथ मंदिर आंदोलन का शंखनाद कर रहे थे, वहीं भाजपा के पितृ पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी ने इस आंदोलन से निश्चित दूरी बनाए रखी। ऐसा नहीं है कि अयोध्या उनके लिए अपरिचित थी या वह रामलला के अनुरागी नहीं थे। वह 1957 …

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बस्ती ओरवब्रिज हादसा : जांच टीम ने गुणवत्ता पर संदेह जताया, कहा-ठोकर से पुल क्रैक होता, गिरता नहीं

बस्ती फुटहिया चौराहे पर ध्वस्त हुए फोरलेन के निर्माणाधीन ओवरब्रिज की जांच के लिए चार सदस्यीय केंद्रीय टीम बस्ती पहुंची। तीन वाहनों से अधिकारी दोपहर बाद तीन बजे घटनास्थल पर पहुंचे। यहां केंद्रीय राज्य सड़क मंत्रालय लखनऊ रीजन के जिम्मेदार अफसर और निर्माण कंपनी के अधिकारी मौजूद रहे। टीम ने पहले दूर खड़े होकर ध्वस्त ब्रिज का जायजा लिया। इसके बाद मलबे के नजदीक आकर बारीकी से मुआयना किया। टीम के लोग ध्वस्त ब्रिज का चारों तरफ से फोटोग्राफी भी करते रहे। एक-एक ¨बदु पर निर्माण कंपनी और मंत्रालय के स्थानीय अधिकारियों से सवाल किया। ज्यादा पूछताछ ब्रिज के मैटेरियल और लोहे के बनाए गए सांचे पर हुई। निर्माण कंपनी की ओर से किसी भारी वाहन द्वारा ठोकर मारने की बात कही गई। बस्ती ओवरब्रिज हादसा : जांच टीम आने तक नहीं हटेगा मलबा यह भी पढ़ें टीम में शामिल तकनीकी विशेषज्ञ इस तर्क को सिरे से खारिज करते रहे। कहा कि ठोकर लगने से ब्रिज हिल सकता था, क्रेक हो सकता था, लेकिन गिरने की गुंजाइश नहीं बनती है। टीम को सामग्रियों की गुणवत्ता पर बार-बार संदेह हुआ। कंक्रीट के दो टुकड़े सैंपल में लिए गए। इसके अलावा निर्माण कंपनी से ब्रिज का डिजाइन और ड्राइंग भी लिया गया। करीब डेढ़ घंटे तक विभिन्न ¨बदुओं पर टीम जांच करती रही। ब्रिज में प्रयुक्त सरिया का मापन भी कराया गया। ब्रिज के ऊपर चढ़कर विशेषज्ञों ने बारीकी से मुआयना किया। इसके बाद टीम जिलाधिकारी डा. राजशेखर से मिलने पहुंची। उनसे बातचीत करके गोरखपुर के लिए रवाना हो गई। टीम में डायरेक्टर जनरल आरडी एंड एसएस एनके सिन्हा, रिटायर्ड चीफ इंजीनियर एमओआरटीएच बीके सिन्हा, सीनियर ¨प्रसिपल साइंटिस्ट इंजीनिय¨रग एंड स्ट्रक्चर्स डिवीजन सीआरआरआइ जीके साहू, चीफ इंजीनियर एनएच डिवीजन यूपी पीडब्ल्यूडी आरआर ¨सह शामिल हैं। मौके पर एमओआरटीएच के चीफ इंजीनियर दिग्विजय मिश्र, अधिशासी अभियंता आशीष शुक्ल, एसडीएम सदर श्री प्रकाश शुक्ल, सीओ अर¨वद वर्मा, थानाध्यक्ष राम आशीष यादव भी मौजूद रहे।

बस्ती फुटहिया चौराहे पर ध्वस्त हुए फोरलेन के निर्माणाधीन ओवरब्रिज की जांच के लिए चार सदस्यीय केंद्रीय टीम बस्ती पहुंची। तीन वाहनों से अधिकारी दोपहर बाद तीन बजे घटनास्थल पर पहुंचे। यहां केंद्रीय राज्य सड़क मंत्रालय लखनऊ रीजन के जिम्मेदार अफसर और निर्माण कंपनी के अधिकारी मौजूद रहे। टीम ने …

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भिक्षावृत्ति की बेड़ियां तोड़ ख्वाब संजोने लगी हैं ये लड़कियां

वो दिन उसके खेलने के थे। जिंदगी की दुश्वारियां और उसके अर्थ को समझने की समझ भी उसमें नहीं थी। बस इतना मालूम था, 'अंकल भूख लगी है पैसे दे दो' कहने से कुछ पैसे मिल जाते हैं। जिससे वह टॉफी, बिस्कुट के साथ कुछ खाना खरीद लेगी। कुछ इसी तरह दिल्ली के रेलवे स्टेशन पर तीन वर्ष की उम्र से भीख मांगकर जिंदगी काट रही थी पूजा। सख्ती हुई तो नानी संग कानपुर सेंट्रल आ गई। यहां भी वही क्रम शुरू हुआ। सुबह इस उम्मीद से शुरू होती, कि आज कुछ ज्यादा मिलेगा और रात इस जद्दोजहद में गुजरती कि कल न जाने किस्मत में क्या लिखा है। सेंट्रल स्टेशन के प्लेटफार्म, आती जाती ट्रेनों और रोज बदलते चेहरों के बीच छह वर्ष कब गुजर गए, पता ही नहीं चला। पूजा नौ वर्ष की हो गई थी। इसी बीच रेलवे चाइल्ड लाइन के कार्यकर्ताओं ने उसे देखा और काउंसिलिंग की। उन्होंने पूजा को पढ़ने के लिए कहा, तो वह तुरंत तैयार हो गई। उसे सुभाष चिल्ड्रेन होम में रखा गया। कुछ माह रहने के बाद नौबस्ता के राजीव विहार स्थित एक स्कूल में उसका दाखिला कराया गया। पूजा बहुत खुश है। स्कूल जाते हुए उसे दो माह हुए हैं और वह अपनी कक्षा की मानीटर बन गई है। एक संस्था की नृत्य कक्षा में वह नियमित जा रही है। पूजा ने बताया कि वह भी दूसरे बच्चों की तरह पढ़ना लिखना चाहती है। क्या बनना चाहती हो के सवाल पर वह बोली, अपनी जैसी लड़कियों की मदद करूंगी। इस जवाब ने साफ कर दिया कि छोटी सी उम्र में उसके इरादे बड़े हैं। फिलहाल पूजा के जैसी कई और बेटियां हैं जिन्होंने इस दंश को झेला, महसूस किया। पूजा की तरह छह वर्षीय शिफा व आसिका, आठ वर्षीय रूबिया और 12 वर्षीय खुशबू की जिंदगी बदल चुकी है। इन बेटियों की भिक्षावृत्ति की बेड़ियां टूटीं और अब वह अपने ख्वाब संजोने को पूरी तरह आजाद हैं। कानपुर में कागजों पर पढ़ाई कर रहे थे 48 हजार बच्चे यह भी पढ़ें (सभी नाम बदले हुए हैं) अपना नाम करना है, कुछ बड़ा काम करना है इन बेटियों से दैनिक जागरण ने बातचीत की तो सभी ने कहा, पढ़ लिखकर अपना नाम करना है। कुछ बड़ा काम करना है। घर जाने का सवाल पूछा तो बोलीं, यहां सब लोग हैं। अब हमें घर नहीं जाना। बता दें ये बेटियां नृत्य, पेंटिंग, गाना गाने जैसे हुनर भी रखती हैं। सुभाष चिल्ड्रेन सोसाइटी के निदेशक कमलकांत तिवारी बताते हैं कि बेटियों का बेहतर भविष्य बनाना ही हमारा लक्ष्य है। कुछ के पतों की जानकारी हुई है लेकिन यह घर नहीं जाना चाहती। ऐसे में हम दबाव नहीं डालते।

वो दिन उसके खेलने के थे। जिंदगी की दुश्वारियां और उसके अर्थ को समझने की समझ भी उसमें नहीं थी। बस इतना मालूम था, ‘अंकल भूख लगी है पैसे दे दो’ कहने से कुछ पैसे मिल जाते हैं। जिससे वह टॉफी, बिस्कुट के साथ कुछ खाना खरीद लेगी। कुछ इसी …

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उत्तर प्रदेश के खिलाडिय़ों को भी दिया अटल बिहारी ने बड़ा तोहफा

राजनीति के माहिर खिलाड़ी पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने खेल के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को बड़ा तोहफा दिया। लखनऊ में भारतीय खेल प्राधिकरण का उप केंद्र उनकी ही देन है। आज यहां पर प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले खिलाड़ी तो ओलंपिक, एशियाई खेल तथा राष्ट्रमंडल खेलों में देश को पदक दिला रहे हैं। अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने संसदीय क्षेत्र रहे लखनऊ को खेल के क्षेत्र में आधुनिक सुविधाएं देने पहली की थी। उसी का नतीजा है कि मौजूदा समय में खेल के क्षेत्र में शहर का विकास दिख रहा है। उन्होंने हर क्षेत्र को शामिल कर शहर के विकास की नींव रखी। इसी तरह खिलाडिय़ों के लिए भी उन्होंने सरोजनी नगर में हज हाउस के पास भारतीय खेल प्राधिकरण का उप केंद्र बनवाया। मौजूदा समय में यह उपकेंद्र से क्षेत्रीय केंद्र बन गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने 23 फरवरी 2004 को भारतीय खेल प्राधिकरण के उपकेंद्र का उद्घाटन भी किया। साईं से साक्षी मलिक, गीता फोगाट, दिनेश फोगाट, पूजा जैसे कई नामी खिलाड़ी समेत अन्य खिलाड़ी भी देश का नाम रोशन कर रहे हैं। इसके अलावा शहर के कई लोगों को रोजगार भी मिला है। इस केंद्र को सुविधाओं को देख कर वर्ष 2014 को इसे साईं नेताजी सुभाष रीजनल सेंटर घोषित किया गया।

राजनीति के माहिर खिलाड़ी पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने खेल के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को बड़ा तोहफा दिया। लखनऊ में भारतीय खेल प्राधिकरण का उप केंद्र उनकी ही देन है। आज यहां पर प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले खिलाड़ी तो ओलंपिक, एशियाई खेल तथा राष्ट्रमंडल खेलों में देश …

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केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ हल्ला बोल, प्रदेश भर में करेंगे यात्रा : शिवपाल

लाखों लोगों के बलिदान से मिली आजादी के बाद आज सरकार की नीतियों की वजह से बड़ा सवाल खड़ा है कि किसका और कैसा विकास हो रहा है। गरीब मजलूम, किसान, नौजवानों के साथ ही लघु व मंझोले व्यवसायी संकट में हैं। भ्रष्टाचार कई गुना बढ़ चुका है। ये बातें 72 वें स्वतंत्रता दिवस पर इटावा के तकिया चौराहे से 18 वीं श्रद्धाजलि यात्रा को रवाना करते हुए पूर्व लोक निर्माण मंत्री शिवपाल ड्क्षसह यादव ने कहीं। उन्होंने कहा कि जल्द ही केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ नौजवानों व आम जन के साथ हल्ला बोलेंगे और प्रदेश भर में यात्रा करेंगे। उन्होंने कहा कि जब आजादी मिली थी तो महात्मा गाधी बहुत दूर नोआखाली के दंगों को शात करने में लगे थे, वे आजादी के जश्न में शामिल नहीं हुए। उन्होंने कहा था कि जब तक किसी के आखों में आसू हो मैं जश्न कैसे मना सकता हूं। शिवपाल कहा कि केंद्र सरकार ने अपना कोई भी वादा पूरा नहीं किया। दो करोड़ रोजगार देने का वादा करने वाले प्रधानमंत्री मोदी रोजगार सहित तमाम वादों को पूरा करने में विफल रहे हैं। युवाओं में निराशा है। उन्होंने सपा कार्यकर्ताओं को सलाह दी कि विपक्ष में रहते सरकार की नीतियों के खिलाफ उनका स्वर मुखर व सशक्त रहे। उन्होंने चौधरी चरण सिंह पीजी कॉलेज, हैंवरा, डिस्ट्रिक्ट कोआपरेटिव बैंक सहित विभिन्न संस्थानों पर ध्वजारोहण व पौधरोपण किया। यहां पर पूर्व मंत्री रामसेवक यादव, पूर्व सपा जिलाध्यक्ष सुनील यादव, पूर्व विधायक व पूर्व सासद रघुराज सिंह शाक्य, पूर्व विधायक सुखदेवी वर्मा, जिला पंचायत सदस्य बबलू यादव, ब्लॉक प्रमुख मोंटी यादव आदि थे।

लाखों लोगों के बलिदान से मिली आजादी के बाद आज सरकार की नीतियों की वजह से बड़ा सवाल खड़ा है कि किसका और कैसा विकास हो रहा है। गरीब मजलूम, किसान, नौजवानों के साथ ही लघु व मंझोले व्यवसायी संकट में हैं। भ्रष्टाचार कई गुना बढ़ चुका है। ये बातें …

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जब अटल बोले, मेरा सौभाग्य मैंने बुद्ध की धरती को छू लिया

वक्त था दूसरे लोकसभा चुनाव का और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बलरामपुर संसदीय सीट से जनसंघ के उम्मीदवार थे। जनसंपर्क के दौरान वह जैतापुर सेमरी के दौरै पर आए थे, लेकिन अचानक वह बस्ती जिले की बिस्कोहर सीमा मे दाखिल हो गए। बिस्कोहर के लोग अटल जी को अपने बीच देख कर अभिभूत हो उठे। चंद मिनटों में अटल जी को फूल मालाओं से लाद दिया गया। पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने जब अटल जी को यह बताया कि यह दूसरे जिले का हिस्सा है तो उन्होंने कहा कि क्या हुआ यह दूसरे जिले का हिस्सा है। मेरा शौभाग्य कि मैंने बुद्ध की धरती को छू लिया। प्रधानमंत्री से रूबरू हुए सौभाग्य योजना के लाभार्थी यह भी पढ़ें वर्ष 1957 में जनसंघ ही विपक्ष का इकलौता चेहरा था और जनसंघ के उम्मीदवार के तौर पर दूसरी लोकसभा में अटल जी तीन लोकसभा क्षेत्रों से उम्मीदवार थे। लखनऊ और मथुरा के अलावा उन्होंने बलरामपुर से भी दावेदारी ठोंकी थी। बलरामपुर में अटल जी गाव-गाव जनसंपर्क कर रहे थे। दो मार्च 1957 को वह जैतापुर सेमरी आए हुए थे। सेमरी से सटे हुए सिद्धार्थनगर ( पूर्व में बस्ती) बिस्कोहर कस्बा है। जनसंपर्क के दौरान अटल जी का काफिला ऐतिहासिक कस्बा बिस्कोहर में दाखिल हुआ। लोगों को उम्मीद नहीं थी कि अटल जी उनके बीच आए हैं। बिस्कोहर पश्चिम पेट्रोल पंप के निकट बेलवा गाव के सीवान में जब अटल जी का काफिला पहुंचा तो समर्थकों ने बताया कि हम लोग दूसरे जनपद की सीमा में दाखिल हो चुके हैं, इसपर उन्होंने कहा कि क्या हुआ जो दूसरे जनपद की सीमा में आ गए यह बुद्ध की पावन धरती है जहा आकर मैं धन्य हो गया। अटल जी के पहुंचने की बात क्षेत्र में आग की तरह फैल गई और कुछ ही देर में स्थानीय लोगों ने फूल मालाओं से लाद दिया। अटल ने लोगों का अभिवादन स्वीकार करते हुए स्थानीय भाषा में सबसे मुखातिब होते हुए पूछा कि 'का हाल है सभै जने के' अटल जी का इतना बोलना था कि पूरी पब्लिक अटल जी के नारे लगाने लगी। अटल जी ने यहा जलपान किया व चालीस मिनट तक रुककर लोगों से बातचीत करते रहे। जाते समय उन्होंने दो लाइनें पढ़ीं- मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं। लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं। इन लाइनों को अटल जी ने 1988 में कविता की शक्ल में लिपिबद्ध किया। आज भी ताजी है अटल जी की याद प्यूरिया निवासी अस्सी वर्षीय लक्ष्मी नेवास कहते हैं कि तब मैं बिस्कोहर में पढ़ता था। अचानक शोर हुआ कि बेलवा में अटल जी पहुंचे हैं। छात्रों के हुजूम के साथ वह भी मौके पर पहुंचे थे। अटल जी ने बच्चों से हाथ मिलाकर पढ़ाई के बारे में पूछताछ की। अहिरौली पड़री के सुकई गिरी बताते हैं कि जिस वक्त अटल जी बेलवा में आए थे वह अपने पिता जी के साथ उक्त गाव में ही एक यजमान के घर रूद्राभिषेक कराने गए थे। शोर मचा कि अटल जी आए हैं मौके पर वह भी पहुंचे और पैर छूकर अटल जी से आशीर्वाद लिया। हरिबंधनपुर के तुलसीराम चौधरी कहते हैं कि जिस वक्त अटल जी बेलवा में आए थे उनकी उम्र बारह वर्ष की थी। बच्चों के साथ वह भी अटल जी को देखने गए थे। जब वह पहुंचे तो अटल जी गुड़ की चाय पी रहे थे। हम बच्चों में भी गुड़ वितरित किया गया था। पूर्व प्रधान महेंद्र नाथ कहते हैं कि वह बिस्कोहर में अपने पिता स्व. पारस नाथ के साथ गाय खरीदने गया थे। शोर मचा कि बेलवा में अटल जी आए हैं। देखने के लिए बेलवा जा पहुंचा। अटल जी उस वक्त स्थानीय लोगों से बात कर रहे थे। उनके पास पहुंचकर आशीर्वाद लिया था। आज भी वह वक्त और अटल जी की वाणी याद है। बारह घटे साथ रहे अटल जी

वक्त था दूसरे लोकसभा चुनाव का और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बलरामपुर संसदीय सीट से जनसंघ के उम्मीदवार थे। जनसंपर्क के दौरान वह जैतापुर सेमरी के दौरै पर आए थे, लेकिन अचानक वह बस्ती जिले की बिस्कोहर सीमा मे दाखिल हो गए। बिस्कोहर के लोग अटल जी को अपने …

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