धर्म

जानिए सावन में क्यों की जाती हैं भगवान शिव की पूजा

सावन का महीना शुरू हो चुका और इस साल सावन के महीने का पहला सोमवार 30 जुलाई को है. हर कोई जानता है कि इस महीने में भगवान शिव की पूजा की जाती है लेकिन आप ये जानते है कि आखिर सावन में ही भगवान शिव की पूजा इतनी ख़ास तरीके से क्यों की जाती है. ऐसा माना गया है कि जो लोग सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा पाठ पूरे विधि विधान के साथ करते हैं उन्हें सारे कष्टों से मुक्ति मिलती है. सावन के महीने में सोमवार के दिन शुद्ध गंगा जल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान करवाकर धूप-दीप जलाकर मंत्र का जाप करने से समस्त बाधाओं का शमन होता है. अगर आपका मन शुद्ध है और आचरण सही है तो सावन के महीने में शिव उपासना से भी मनोवांछित फल मिल सकता है. सावन के महीने में इस तरीके से करें शिव अभिषेक ऐसा कहा जाता है कि इस महीने में भोलेनाथ माता और माता पार्वती दोनों ही शुभ आशीर्वाद प्रदान करते हैं. इसके अलावा भी शिव जी का पूरा परिवार, गण और अवतार इस मास में प्रसन्न मुद्रा में वरदान देते हैं यही वजह है कि सवान के महीने में आने वाले सोमवार को भगवान शिव की ख़ास तरीके से पूजा की जाती हैं. Sawan 2018 : मनचाहे फल की प्राप्ति के लिए इन चीजों से खोले सोमवार व्रत ऐसा भी कहा जाता है कि अगर कोई लंबे समय से किसी बिमारी से परेशान है तो वह इस ख़ास मन्त्र का जाप सवान के महीने में करें वह जल्द ही बिमारी से छुटकारा पा लेगा. 'महामृत्युंजय मंत्र' ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ

सावन का महीना शुरू हो चुका और इस साल सावन के महीने का पहला सोमवार 30 जुलाई को है. हर कोई जानता है कि इस महीने में भगवान शिव की पूजा की जाती है लेकिन आप ये जानते है कि आखिर सावन में ही भगवान शिव की पूजा इतनी ख़ास …

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बाइबिल के अनुसार, धरती के विनाश का संकेत है चंद्रग्रहण

बाइबिल के अनुसार, धरती के विनाश का संकेत है चंद्रग्रहण

आज सदी का सबसे बड़ा चंद्र ग्रहण होने वाला है , जिसके बारे में अभी से टीका-टिप्पणी शुरू हो गई है. विश्वभर के लिए ये एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है, क्योंकि इस बार पूर्ण चंद्र ग्रहण होने वाला है, इसकी कुल अवधि 6 घंटा 14 मिनट रहेगी. कुछ लोग इसे …

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सावन के पहले दिन ऐसे करें शिव पूजा

शिवजी का प्रिय महीना सावन शुरू हो चुका है जिसमें शिवजी की भक्ति की जाती है. वैसे तो ये महीना आषाढ़ मास की पूर्णिमा से शुरू हो जाता है लेकिन इस बार की पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण होने के कारण इसे कुछ ख़ास नहीं माना गया. इसके बाद शनिवार से ही सावन का पहला दिन माना जायेगा. 28 जुलाई से सावन का पहला दिन है और सभी इस दिन भगवान शिव की आराधना करना शुरू कर रहे हैं. तो चलिए हम बता देते हैं किस तरह पहले दिन करना हो शिवजी की पूजा. सावन में कांवड़ चढाने के सख्त होते हैं नियम सावन के महीने को खास बनाने के लिए आप कुछ खास तरीके से शिवजी की पूजा कर सकते हैं और इसी पूजन से आप शिवजी को प्रसन्न कर सकते हैं. कहा जा रहा है इस साल सावन का महीना बहुत खास है क्योंकि इस वर्ष कई सैलून बाद ये विशेष संयोग बन रहा है. आइये जानते हैं की तरह करना है आपको पहले दिन पूजन. * ग्रहण हुआ है तो शनिवार को पहले दिन घर को साफ़ सुधरा कर लें और घर में पवित्र जल छिड़क लें. * घर में रखी भगवान की मूर्तियों को गंगाजल से साफ़ करें और उसके बाद उनका पूजन करें. * घर के माहौल को शुद्ध बनाएं और सकारात्मक ऊर्जा बनाने की कोशिश करें. सावन में ही क्यों चढ़ाई जाती है भगवान शिव को कांवड़ ? * इसी के बाद आप भगवान शिव का आगमन घर में कर सकते हैं. * शिव मंत्र ॐ नमः शिवाय से भगवान शिव का अभिषेक करें और मन ही मन इसी मंत्र को उच्चारित करते रहें. * इस दिन आप महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी कर सकते हैं जो बेहद ही सुखदायी होता है.

शिवजी का प्रिय महीना सावन शुरू हो चुका है जिसमें शिवजी की भक्ति की जाती है. वैसे तो ये महीना आषाढ़ मास की पूर्णिमा से शुरू हो जाता है लेकिन इस बार की पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण होने के कारण इसे कुछ ख़ास नहीं माना गया. इसके बाद शनिवार से ही …

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सावन के पहले दिन खरीदेंगे ये चीजें तो हर काम में मिलेगी सफलता

सावन के पहले दिन खरीदेंगे ये चीजें तो हर काम में मिलेगी सफलता

पिछले कई दिनों से लोग सावन महीने का इंतज़ार कर रहे थे अब आपका इंतज़ार ख़त्म हो चुका है क्योंकि आज यानी 28 जुलाई से सावन के महीने की शुरुआत हो चुकी है. सावन महीने का पहला दिन सबसे शुभ होता है यही नहीं बल्कि अगर आप इस ख़ास दिन …

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गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सांई बाबा की निकली भव्य पालकी

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सांई बाबा की पालकी का उत्सव भी मनाया जाता है। इसी खास अवसर पर शिरडी के श्री साई मंदिर में हवन के साथ सांई बाबा की पालकी भी निकाली गई और जमकर जश्न भी मनाया गया। आपको बता दें, सुबह से ही इस आयोजन में …

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सावन में ही क्यों चढ़ाई जाती है भगवान शिव को कांवड़ ?

सावन में ही क्यों चढ़ाई जाती है भगवान शिव को कांवड़ ?

27 जुलाई से सावन का महीना शुरू हो रहा है लेकिन चंद्रग्रहण के कारण इसे 28 जुलाई से माना जायेगा. ये महीना भगवान शिव के लिए और शिव भक्तों के लिए बेहद ही खास होता है. इस महीने में भगवान शिव की आराधना की जाती है और कुछ लोग पूरे महीने …

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दुर्लभ योग के साथ शुरू होगा सावन, भूलकर भी न करें ये 10 काम

दुर्लभ योग के साथ शुरू होगा सावन, भूलकर भी न करें ये 10 काम

28 जुलाई से शुरू हो रहे सावन के महीने में दुर्लभ योग बन रहा है। यह भगवान शिव को मनाने का बहुत अच्छा समय है, लेकिन कुछ सावधानियों के साथ वरना नाराज हो जाएंगे। चंडीगढ़ में सेक्टर 30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण …

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21वीं सदी का सबसे लंबा पूर्ण चंद्रग्रहण आज, जानिए चांद से जुड़ी ये महत्वपूर्ण जानकारी

21वीं सदी का सबसे लंबा पूर्ण चंद्रग्रहण आज, जानिए चांद से जुड़ी ये महत्वपूर्ण जानकारी

आज की रात होने वाला चंद्रगहण 21वीं सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण माना जा रहा है। इसकी कुल अवधि 6 घंटा 14 मिनट रहेगी। इसमें पूर्णचंद्र ग्रहण की स्थिति 103 मिनट तक रहेगी। भारत में यह लगभग शुक्रवार (आज) रात्रि 11 बजकर 55 मिनट से शुरू हो कर लगभग शनिवार …

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27 जुलाई 2018 का राशिफल: जानिए आज चंद्रग्रहण के दिन किन राशियों के रहेगा शुभ

27 जुलाई 2018 का राशिफल: जानिए आज चंद्रग्रहण के दिन किन राशियों के रहेगा शुभ

मेष: दिन मिश्रित फलदायी रहेगा। परिजनों के साथ बैठकर महत्वपूर्ण चर्चा करेंगे। ऑफिस या व्यवसाय के क्षेत्र में अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। सरकारी लाभ मिलने की संभावना है। कार्यभार बढ़ सकता है। वृषभ: नए कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी और आप उन्हें प्रारंभ कर पाएंगे। व्यापार …

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जब राजा जगतसिंह की आराधना से प्रसन्न होकर सूर्य ने जनता को दिए दर्शन

राव जगतसिंह जोधपुर के पहले महाराजा जसवंतसिंह के वंशज थे और रिश्ते में भक्तिमयी मीराबाई के भतीजे लगते थे। वह बलूंदा रियासत के शासक भी थे साथ ही परम वैष्णव भक्त भी थे। वैष्णव रंग में रंगे होने की वजह से वह राजसी ठाठबाट छोड़कर सदैव भगवत भक्ति में लीन रहते थे। मेवाड़ में उन्होंने एक मंदिर का निर्माण भी करवाया था। एकबार वर्षाकाल का समय था। चारों और भयानक बारिश हो रही थी। चारों ओर घना अंधेरा छाया हुआ था। उस समय जोधपुर के लोगों ने सूर्य देवता के दर्शन कर व्रत खोलने का संकल्प ले रखा था। उन्हे जब सूर्य देवता के उदय की कोई उम्मीद नजर नहीं आई तो वह चिंतित हो गए। आखिर कुछ लोग जोधपुर नरेश के पास पहुंचे और उन्होंने महाराज से अनुरोध किया कि ' महाराज आप ही हमारे सूर्य हैं यदि आप हाथी पर सवार होकर नगर में लोगों को दर्शन दे देवें, तो आमजन भोजन ग्रहण कर लेंगे।' महाराज ने कहा कि ' आप लोगों की बात तो सही है, लेकिन व्रत तो मैने भी ले रखा है और मेरे लिए भी सूर्यनारायण के दर्शन करना आवश्यक है। उनके उदित नहीं होने से मैं किसके दर्शन करूं? ' अकस्मात उनको राव जगतसिंह का ख्याल आया और वह उनके पास गए। जगतसिंह उस समय श्रीकृष्ण की पूजा कर रहे थे। पूजा समाप्त होने पर जब जोधपुर नरेश ने उनको अपने आने का प्रयोजन बताया कि उनको सूर्यदेवता के समान सम्मान दिया गया है। भगवान की श्रेणी में अपनी गणना किया जाना जगतसिंह को अच्छा नहीं लगा। उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और सूर्य देवता से दर्शन देने के लिए विनती करने लगे। भगवान भास्कर ने उनकी विनती सुनी और बादलों को चीरकर प्रगट हो गए। राव जगतसिंह की प्रार्थना का असर देखकर लोग उनकी जय-जकार करने लगे।

राव जगतसिंह जोधपुर के पहले महाराजा जसवंतसिंह के वंशज थे और रिश्ते में भक्तिमयी मीराबाई के भतीजे लगते थे। वह बलूंदा रियासत के शासक भी थे साथ ही परम वैष्णव भक्त भी थे। वैष्णव रंग में रंगे होने की वजह से वह राजसी ठाठबाट छोड़कर सदैव भगवत भक्ति में लीन …

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