खामोश हुआ आबादी वाला शहर, 1965 और 1971 के युद्ध में भी नहीं थे ऐसे हालात

सुनसान गलियां…। बिल्कुल खामोश। हर तरफ दीवारों पर छर्रों के निशान। कहीं टूटी हुई ईंटें। कहीं पर छत में छेद। घरों के आंगन का

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