Politics: कन्हैया कुमार के लोकसभा चुनाव लडऩे की चर्चा तेज, जानिए कौन सी सीट से लड़ सकत हैं!

बिहार: लोकसभा चुनाव का वक्त जैसे-जैसे करीब आ रहा है, वैसे-वैसे अटकलों का दौरा भी तेज होता जा रहा है। अब अगर बिहार की राजनीति की बात की जाये तो ऐसी चर्चा है कि यहां पर विपक्षी दल एकजुट होकर भाजपा के खिलाफ चुनाव लडऩे का मन बना रही हैं। इस पर एक बड़ी खबर भी सामने आ रही है कि जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के बिहार से लोकसभा चुनाव लडऩे की चर्चा हैण् वे महागठबंधन के उम्मीदवार हो सकते हैं।


चर्चा है कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी पूर्व जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को उनके गृह जिला बेगूसराय सीट से उम्मीदवार बना सकती है। बता दें कि कन्हैया बेगूसराय जिले के बरौनी प्रखंड के बीहट पंचायत के निवासी हैं। साल 2016 में जेएनयू के अध्यक्ष रहने के दौरान कन्हैया कुमार पर देशद्रोही नारे लगाने के आरोप लगे थे।

कन्हैया को पुलिस हिरासत में भी लिया गया था लेकिन बाद में हाईकोर्ट से उन्हें केस में जमानत मिल गई थी। कन्हैया भी कई मंचों पर चुनाव लडऩे की बात कर चुके हैं। बेगुसराय में सीपीआई की जमीन मजबूत रही है और इस पार्टी का इस क्षेत्र में अच्छा जनाधार रहा है। हालांकि हाल में ही यहां के वोटर बीजेपी के साथ नजर आए हैं। लोकसभा चुनाव 2014 में पहली बार बीजेपी को इस सीट से जीत मिली थी।

सूत्रों के मुताबिक सहयोगी दलों के बीच अब तक की वार्ता के अनुसार बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से लगभग आधी सीटों पर लालू की पार्टी आरजेडी लड़ेगी, कांग्रेस को 10 और हम को 4 सीटें मिलने की संभावना है। इसके अलावा एनसीपी और वाम दल को एक-एक सीट दी जा सकती है। वर्ष 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में अपने विधायकों की संख्या बढऩे के मद्देनजर कांग्रेस द्वारा और अधिक लोकसभा सीटों की मांग की जा रही है।

एनडीए से नाता तोड़कर महागठबंधन में शामिल हुई हम पांच सीटें हासिल करने की कोशिश में है। एनसीपी अपने पार्टी महासचिव तारिक अनवर को उनकी कटिहार सीट से दोहरा सकती है। शरद यादव अपने बेटे को आरजेडी के चुनाव चिह्न पर चुनावी मैदान में उतार सकते हैं।

आरएलएसपी प्रमुख उपेंद्र कुश्वाहा ने जेडीयू सुप्रीमो नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लडऩे से इनकार कर दिया है। आरएलएसपी के फिलहाल तीन सांसद हैं। महागठबंधन उनकी नाराजगी का फायदा उठाकर उन्हें अपने खेमे में जोडऩा चाहता है। उन्हें 4 सीटें दी जा सकती हैं, हालांकि उपेंद्र महागठबंधन से जुडऩे की खबरों को खारिज करते रहे हैं लेकिन जेडीयू और बीजेपी के फिर से एक हो जाने के बाद बदले हालात में उनके लिए महगठबंधन बेहतर विकल्प हो सकता है।

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