नगरोटा हमला: आर्मी अफसरों की ‘बहादुर’ पत्नियों ने…

जम्मू के नगरोटा में हुए आतंकवादी हमले में सेना को और बड़ा नुकसान हो सकता था, अगर दो आर्मी अफसरों की पत्नियां बहादुरी न दिखातीं। फैमिली क्वार्टर्स में रह रहीं इन महिलाओं की बदौलत ही ‘बंधक संकट’ ज्यादा बड़ा रूप नहीं ले सका। इस आतंकवादी हमले में दो अफसरों समेत 7 सैनिक शहीद हो गए, जबकि हमला करने वाले तीनों आतंकियों को भी मार गिराया गया।
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पुलिस की यूनिफॉर्म पहने भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने जब आर्मी यूनिट पर हमला किया, तो उनका मकसद फैमिली क्वॉर्टर्स में घुसना था, ताकि वे वहां रह रहे सैनिकों के परिवारों को बंधक बना सकें। अपने नवजात बच्चों के साथ फैमिली क्वार्टर में रह रहीं दो महिलाओं की बहादुरी ने चलते आतंकियों के मंसूबे पर पानी फिर गया। एक आर्मी अफसर ने बताया, ‘दो आर्मी अफसरों की पत्नियों ने साहस दिखाते हुए घर के कुछ सामानों की मदद से अपने क्वार्टर की एंट्री को ब्लॉक कर दिया, जिससे आतंकवादियों के लिए घर में दाखिल होना मुश्किल हो गया।’

अफसर ने कहा, ‘अगर इन महिलाओं ने मुस्तैदी न दिखाई होती, तो आतंकवादी उन्हें बंधक बनाने में सफल हो जाते और सेना को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते थे।’

सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल मनीष मेहता ने कहा, ‘आतंकवादी दो बिल्डिंग्स में घुसे जिसमें सैनिकों के परिवार रहते हैं। इससे ‘बंधक सकंट’ जैसे हालात बन गए। इसके बाद सेना ने फौरन कार्रवाई करते हुए वहां से 12 सैनिकों, दो महिलाओं और दो बच्चों को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया।’

 
अधिकारी ने बताया कि जिन दो बच्चों को बचाया गया है उनकी उम्र महज 18 महीने और दो महीने की है। हालांकि, इस रेस्क्यू के दौरान एक अफसर और दो जवान शहीद हो गए। तीन आतंकवादियों के शव बरामद किए गए हैं और पूरे इलाके की तलाशी के लिए ऑपरेशन चलाया गया। सेना ने सर्च ऑपरेशन खत्म नहीं किया है क्योंकि वह अच्छी तरह पूरे इलाके की तलाशी लेना चाहती है, पर फिलहाल सुबह तक के लिए ऑपरेशन को स्थगित कर दिया गया है।
 
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