सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: देश के सभी राजमार्गों को टोल फ्री करे सरकार

नई दिल्ली : दिल्ली -NCR के लोगों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी खुशखबरी आई है। कोर्ट ने DND Toll Road को टोल फ्री रखा है।

 
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इलाहबाद हाईकोर्ट का फैसला जारी रखते हुए कहा कि DND फ्लाइवे टोल फ्री ही रहेगा। कोर्ट ने साथ ही सरकार को नसीहत दी कि राजमार्ग जनता की प्राथमिक जरुरत में से एक है। उससे कर वसलूना ठीक नहीं है। कोर्ट ने सरकार से कहा कि वो देश के सभी राजमार्गों को टोल फ्री करने पर विचार करे।

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इससे पहले गत माह इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा कि DND पर Toll टैक्स की वसूली तत्काल प्रभाव से रोक दी जाए।DND से गुज़रने वाले लोगों को 12 रुपये और 28 रुपये की दैनिक गुलामी से मुक्ति मिल गई है। आपको बता दें कि DND से एक बार गुज़रने पर कार चालक को 28 रुपये का Toll Tax देना पड़ता है। जबकि Two Wheeler चलाने वाले को 12 रुपये का टोल टैक्स देना पड़ता है। 

 
हालांकि देश की कई सड़कें अब भी ऐसी हैं। जहां से गुज़रने वाले लोगों को रोज़ टोल टैक्स वाला टॉर्चर झेलना पड़ता है।
आपने नेट Neutrality के बारे में ज़रूर पढ़ा और सुना होगा लेकिन हमें लगता है कि अब पूरे देश में Road Neutrality होनी चाहिए। 
देश के हर नागरिक को अच्छी और सुरक्षित सड़क पर Drive करने का अधिकार मिलना ज़रूरी है…हम पूरी ज़िंदगी सरकार को तरह तरह के टैक्स देते हैं.. जैसे इनकम टैक्स, सर्विस टैक्स, वैट, इंटरटेनमेंट टैक्स। 
यहां तक कि नया वाहन खरीदते समय हम रोड टैक्स भी देते हैं लेकिन अब तक हमें अच्छी सड़क पर चलने का पूर्ण अधिकार नहीं मिला है..ये भारतवासियों के पूर्ण स्वराज वाली सोच का हिस्सा है। 
 
 देश में कई टोल Roads ऐसी हैं जो इच्छामृत्यु मांग रही हैं। लेकिन प्राइवेट कंपनियों का लालच और सरकारी भ्रष्टाचार इन Toll Roads के लिए Life Support System का काम कर रहा है। 
 
Noida Residents Welfare Associations ने DND को टोल मुक्त कराने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी।
DND को संचालित करने वाली कंपनी  Noida Toll Bridge Company Limited यानी NTBCL पर लगातार ये आरोप लगते रहे हैं कि कंपनी ने बहुत पहले ही अपने हिस्से का मुनाफा कमा लिया है और अब जो टोल टैक्स वसूला जा रहा है वो अनैतिक है।
यही बात इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी अपने फैसले में कही, हाइकोर्ट ने DND को टोल फ्री करने का आदेश देते हुए NTBCL से कहा कि आप पहले ही ज्यादा पैसे वसूल चुके हैं। और अब आपको और टैक्स वसूलने का अधिकार नहीं है।
आपको बता दें कि इस जनहित याचिका पर कोर्ट में 80 से ज्यादा सुनवाईयां  हुईं और इस बीच टोल वसूलने वाली कंपनी ने तीन बार Toll tax बढ़ा दिया।
 
DND Flyway के निर्माण के लिए 7 अप्रैल 1992 को नोएडा और दिल्ली सरकार के बीच एक एग्रीमेंट हुआ था।  इसके लिए दिल्ली और नोएडा प्रशासन ने Infrastructure Leasing And Finance Company यानी IL&FS के साथ करार किया।
IL&FS ने 8 अप्रैल 1996 को Noida Toll Bridge Company Limited यानी NTBCL का गठन किया।
वर्ष 2001 में दिल्ली-नोएडा DND टोल ब्रिज शुरु हो गया। DND टोल ब्रिज की निर्माण लागत 408 करोड़ 20 लाख रुपये आई।
सरकारी एग्रीमेंट के मुताबिक DND टोल ब्रिज बनाने वाली कंपनी..NTBCL को 30 वर्षों तक टोल वसूलने का लाइसेंस मिला।
NTBCL अब भी ये दावा कर रही है कि उसनें Toll Bridge से कोई मुनाफा नहीं कमाया है। हाल ही में कंपनी ने ये भी कहा था कि अगर 2031 तक भी मुनाफा हासिल नहीं हुआ तो Toll Tax वसूलने की अवधि 2 साल के लिए और बढ़ाई जा सकती है।
यानी कंपनी 2033 तक भी टोल टैक्स वसूल सकती है। हो सकता है कि 2033 में भी कंपनी ये कह दें  उसने अभी भी कोई मुनाफा नहीं कमाया है। और फिर से वसूली शुरू कर दे।

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हमें लगता है कि ये सरकारों और एक प्राइवेट कंपनी के बीच हुआ ऐसा समझौता है। जिसमें आम लोगों से अनंत काल तक Toll Tax वूसलने की क्षमता है।

किसी विशेष सड़क का इस्तेमाल करने पर Tax वसूले जाने की प्रथा नई नहीं है।  करीब 2300 वर्ष पहले लिखे गए अर्थशास्त्र में भी टोल टैक्स का जिक्र मिलता है।
सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के मुताबिक 2001 से 2016 के बीच राष्ट्रीय राजमार्गों पर बने Toll Plazas से करीब 48 हज़ार 806 करोड़ रुपये का Toll वसूला गया। 
 
सड़कों का निर्माण करने वाली कंपनियों और सरकारों का तर्क है कि ये रकम सड़कों के निर्माण और उनकी देखरेख पर ही खर्च की जाती है।
भारत में ज्यादातर Toll Roads का निर्माण BOT के आधार पर होता है। BOT का अर्थ है Built Operate Transfer। ये पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप है जिसमें सरकार और प्राइवेट कंपनियां साझेदार होती हैं।
इस व्यवस्था के तहत प्राइवेट कंपनी पहले Toll Road का निर्माण करती है। फिर उसे ऑपरेट करती है यानी संचालन करती है। इस दौरान Toll Tax के ज़रिए कंपनी लागत वसूलती है और इस पर अपना जायज़ मुनाफा भी कमाती है। 
 
लागत और मुनाफा वसूल हो जाने के बाद Toll Road सरकार को सौंप दी जाती है।  इस व्यवस्था में कोई बुराई नहीं है लेकिन भारत में ये सब कुछ इतना पारदर्शी नहीं होता। 
जिस Toll Road से आप गुजर रहे हैं उसकी बैलेंस शीट के बारे में आपको कोई जानकारी नहीं दी जाती और आप टोल टैक्स देते चले जाते हैं।
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