बदलते मौसमों के लिए ठहरी हुई शायरी

तपिश और बढ़ गई इन चंद बूंदों के बाद,  काले स्याह बादल ने भी बस यूँ ही बहलाया मुझे. सतरंगी अरमानों वाले,  सपने दिल

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